दो नंबर से रह गए

दिलीप भाटिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

प्रतियोगिता परीक्षा के आप भी एक उम्मीदवार हैं? उम्मीद के साथ ही फॉर्म भरा है? दिलीप की दिल से शुभकामना। पारिवारिक सामंजस्य नहीं होने के कारण कई उम्मीदवार मेरे आलेख नहीं पढ़ पाते, फोन भी नहीं कर पाते, मिलना तो दुर्लभ है ही। परिणाम निकलने पर अधिकांश उम्मीदवार इतना ही कहते हैं कि दो नंबर से रह गए। एक रटा-रटाया वाक्य प्रत्येक असफल कैंडिडेट दोहराता है। कारण का विश्लेषण नहीं करता। पढ़ाई का तरीका अधूरा है, पढ़ा है पर पढ़े हुए को लिखा नहीं। पूरा कोर्स नहीं किया। लक्ष्य बस न्यूनतम अंकों का रखा, पेपर की प्रैक्टिस नहीं करी। कठिन प्रश्नों में समय अधिक लग गया और सरल प्रश्न छूट गए।
दिलीप अंकल निस्वार्थ मार्गदर्शन देने के लिए बुलाते रहे। परिवार के सदस्यों की अनुमति नहीं मिली, खुद की भी इच्छा नहीं हुई, अतिविश्वास की बीमारी जो थी। कोचिंग कर ली है, गाइड खरीद ली हैं। पुराने ज़माने के बूढ़े अंकल क्या ज्ञान देंगे, गूगल इंटरनेट यू ट्यूब पर सब कुछ है ही। पति भी नहीं चाहता कि पत्नी उससे आगे निकले। जेठानी को ईर्ष्या है कि देवरानी कैसे आगे निकल सकती है। हम तो कविता पढ़ेंगे सम्मान बटोरेंगे। पेट पालने के लिए प्राइवेट स्कूल ही बहुत है। ससुरजी, पापाजी के पास धन का भंडार है ही। जाएंगे तो खाली हाथ ही, सब हमारा ही तो है। परीक्षा का फॉर्म भर दिया है। इसी प्रकार की अनगिनत बहाने बाजी से सबको नहीं स्वयं को ही बेवकूफ बनना होता है। कड़वे सच बुरे लग रहें हैं क्या?
दिलीप अंकल का क्या स्वार्थ है, जो हमें बिन मांगे सलाह दे रहे हैं। स्पष्ट कर देता हूं, आप इस पत्र को पढ़कर डिलीट कर सकते है। 90 प्रतिशत करेंगे भी, पर आपकी इच्छा इस बार सफल होने की हो तो संपर्क कर लीजिएगा। रावतभाटा कोटा में हो तो परीक्षा से पहले मिल लीजिएगा। 9461591498 पर पहले समय लेकर आएं। 100 प्रतिशत का लक्ष्य निर्धारित करें, कटऑफ कितनी भी जाए, परन्तु आप दो नंबर से नहीं रहेंगे। पूरा समय है, पूरा कोर्स करें, नोट्स बनाएं। मॉडल पेपर निर्धारित समय में प्रैक्टिस करें, परीक्षा में सरल प्रश्न पहले करें। आर्ट्स के विद्यार्थी गणित मेंटल एबिलिटी लॉजिकल रीजनिंग के प्रश्न बाद में करें, क्योंकि इन प्रश्नों में अधिक समय लगेगा और सरल प्रश्न छूट जायेंगे। पढ़ने का भी तरीका होता है। परीक्षा देने का भी तरीका होता है। सब कुछ यहां लिखना संभव नहीं है। पोस्ट पाने का लक्ष्य हासिल करना है, तो संपर्क कर मिलिए। डॉक्टर की दवा समय से खाने एवं परहेज करने से ही बीमारी ठीक होती है। उसी प्रकार आप सबके अपने दिलीप अंकल पर भरोसा कर उनके बतलाए टिप्स पर अमल करेंगे तो निश्चय ही दो नंबर से रहने का प्रश्न ही नहीं होगा।
सेवानिवृत्त परमाणु वैज्ञानिक अधिकारी 238 बालाजी नगर (रावतभाटा) राजस्थान 

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