भोर का गान

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

पांच बजे हम जागते, करते जल का पान।
तीन कोस का घूमना, तन का नित व्यायाम।।
संग हमारे प्रेम है, दो-दो राम सहाय।
आगे राजाराम है, दशरथ को मिल जाय।।
बैजनाथ की जातरा, भोले का है गान।
प्रात समय अनमोल है, कहत हैं कवि मसान।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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