व्याकरण के दोहे (भाग-2)

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

एकार्थी अरु बहुअर्थी, सार्थक लोम विलोम।
पुनि निर्थक श्रुतिसमलखो, शबद अरथ के रोम।21
व्युत्पत्ति के हि शब्द हैं, योगरूढ अरु रूढ ।
यौगिक शब्दहि जानिये, गौशाला आरूढ । 22
कहावत तोवाक्य है, मुहावर वाक् अंश ।
तत्सम तद्भव जानिए, अरु जानोअपभ्रंश || 23
वरण मिल के शब्द बने, वाक्य शब्द से होय ।
शब्द-शब्द में भेद है, शब्दो में सब कोय | 24
वाक्य निर्माण तुम करो, रचना अर्थानुसार ।
सरल मिश्र संयुक्त रचो, विधि आज्ञा को धार।25
उपसर्ग प्रत्यय से करो, नये शब्द निर्माण ।
संधि समासा भी करें, भाषा का कल्याण || 28
उपसर्ग आगे आतु है, प्रत्यय पीछे मान ।
अति अधि अनु उपसर्ग हैं, वान मान प्रत् जान ।
बाइस संस्कृत जानिए, बे ला उर्दू मान ।
ता पीछे भी और है, हिन्दी उपसर ज्ञान || 28
 द्वन्द में समता लखो, तत् में संज्ञा आय ।
संख्या में द्विगु होत है, विशेष कर्मधराय || 29
अव्ययी में अव्यय रहें, बहु तीजे पर जाय ।
 समास के छे भेद है, और बात कछु नाय || 30
स्वर व्यंजन अरु विसर्ग , संधि भेद है तीन ।
शब्दों को विच्छेद कर, संधी होती क्षीण || 31
स्वर से ही जब स्वर मिले, स्वर संधी का आन ।
अच् हल, हल् अच् जब मिले, व्यंजन संधी मान।
वरण बीच विसर्ग लगे, विसर्ग संधी आया।
संधी तीनहि जानिए, भाषा रूप धराय ॥ 33
कर्ता प्रथमा विभक्ति हि, ने चिह्न का हि आनि ।
कर्म द्वितीया में लखो, को लीजे पहिचानि ॥ 34
करण तृतीया से रहे, सम्प्र के लिये आय ।
अपादान से पंचमी , का-की षष्ठी पाय ।35
अधिकरण है में पे पर, सातम का है आन ।
सम्बोधन हेअरे कह, यहि कारक पहिचान ।। 36
हिन्दी की बिन्दी सदा, रही लोक में छाय ।
नुक्का, विराम चिहन में, सब जग गोता खाय।37
दूसर जन की बात को, “अवतरणा” में जान ।
छूट को जब तुम लिखो, हंस चिह्न का आन। 38
अल्प रुके कामा लगे, अति में पूर्ण विराम ।
सम शब्दों में डेस है- पूछत प्रश्न निसान ? 39
था थी थे में भूत है, ता ती में वर्तमान ।
गा गी गे में भविष्य है, तीन काल पहिचान ।। 40
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

Related posts

Leave a Comment