श्रीराम कॉलेज में विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर श्वेतपट्ट चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुज़फ्फरनगर। श्रीराम कॉलेज के बायोसाइंस विभाग में विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर आज श्वेतपट्ट चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमे संकाय के विद्यार्थियों ने अपने कलात्मक और सृजनात्मक दृष्टिकोण से विभिन्न प्रकार के रंगों द्वारा इस साल विश्व वन्यजीव दिवस की थीम ‘वन और आजीविकाः मनुष्य और ग्रह के अस्तित्व को बनाये रखना’’ के लिये श्वेतपत् पर चित्र प्रस्तुत किये.।
विभागाध्यक्ष डाॅ0 सौरभ जैन ने बताया की विश्व वन्यजीव दिवस का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में जागरूकता, सहयोग और समन्वय स्थापित करना है। वन्यजीवों और वनस्पतियों के संरक्षण से मिलने वाले लाभ के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन दुनियाभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। तत्पश्चात शायमा सैफी ने विद्यार्थियों को प्रतियोगिता के नियमों की जानकारी दी। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर बीएससी माइक्रोबायोलॉजी तृतीय वर्ष रही, जिसमें शिल्पा, श्रद्धा, अजहर, अजय, सलोनी एवं प्रिया चैधरी ने थीम के आधिकारिक पोस्टर को हूबहू चित्रित किया। द्वितीय स्थान पर एमएससी माइक्रोबायोलॉजी की छात्रा अफसा रही। जिन्होंने विलुप्त हो रही प्रजातियों का चित्रण किया। ततृीय स्थान पर बीएससी माइक्रोबायोलॉजी प्रथम वर्ष की छात्रा तेजस्वनी सिंह रही। जिन्होंने वायु एवं जल प्रदूषण के वन्य जीवों पर पडने वाले दुष्प्रभाव को चित्रित किया।
श्रीराम काॅलेज की प्राचार्य डा0 प्रेरणा मित्तल ने बताया की विश्व वन्यजीव दिवस के माध्यम से हर साल अलग-अलग थीम के माध्यम से लोगों में जागरुकता फैलाई जाती है। यह थीम लुप्त हो रहे जीवों और प्राकृतिक वनस्पतियों के संरक्षण से संबंधित होती है। 20 दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 68वें सत्र में 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस घोषित किया था। उन्होंने कहा कि इसे थाईलैंड की ओर से विश्व के वन्यजीवों और वनस्पतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मनाने के लिए प्रस्तावित किया गया था। साल 1872 में वन्य जीवों को विलुप्त होने से रोकने के लिए सबसे पहले जंगली हाथी संरक्षण अधिनियम (वाइल्ड एलीफेंट प्रिजर्वेशन एक्ट) पारित किया गया था। श्रीराम काॅलेज आफ फार्मेसी के निदेशक डा0 गिरेन्द्र गौतम ने बताया की प्रकृति में अनेक प्रकार के जीव-जन्तु हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र (म्बवेलेजमउ) के अनुरूप विकसित हुए हैं और उनका जीवन तब तक सामान्य रूप से चलता रहता है जब तक पर्यावरण अनुकूल रहता है। लेकिन मनुष्य ने विकास के क्रम में न केवल पारिस्थितिक तंत्र को बिगाड़ा है, बल्कि वन्यजीवों और समुद्री जीवों के अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ जंगल खत्म हो रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर प्रदूषण भी लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रकृति में नकारात्मक बदलाव हो रहा है, और ग्लोबल वार्मिंग जैसे भयावह परिणाम देखने को मिल रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में, प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विश्व वन्यजीव दिवस बेहद महत्वपूर्ण है।
निर्णायक मंडल में श्रीराम काॅलेज की प्राचार्य डा0 प्रेरणा मित्तल एवं श्रीराम काॅलेज आफ फार्मेसी के निदेशक डा0 गिरेन्द्र गौतम रहे। निर्णायक मंडल द्वारा विजेताओं को पुरस्कृत किया गया एवं सभी उपस्थित विद्यार्थियों को वन्यजीवों एवं प्राकृतिक वनस्पतियों को सरंक्षण देने की शपथ दिलाई गयी।
इस अवसर पर बायोसाइंस विभाग के प्रवक्ता अंकित कुमार, विकास कुमार, डॉ0 समीक्षा जोशी, लवी शर्मा, छवि गोयल, रजत धारीवाल, सचिन कुमार, रोहिणी सैनी, दर्शिका शर्मा आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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