संत रैदास चालीसा (जयंती पर विशेष)

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मां गंगा ने कृपा करि, कंगन दे सम्मान।

मानवता की साधना, भक्त रैदास महान।।

जयजयजय सद्गुरु रैदासा।
सद्गुण ज्ञानी विश्व समाजा।१
माघ मास पूनम उजियारी।
चन्द्र ग्रहण भी लागा भारी।।२
रविवासर दिन शुभ था आई।
संवत चौदह तैंतिस भाई।।३
काशी के ढिंग मांडुर ग्रामा।
जन्मे सदगुरु पावन धामा।।४
राघू दास पिता कहाये।
करमा देवी कोंख सु आये।।५
धरम संगिनी देवी लोना।
पूत दास विजय सलोना।।६
रवि रैदासा नाम तुम्हारा।
नाम सुमिरता सब संसारा।।७
सात बरस की उमर कहाई।
नवधा भक्ति आपने पाई।।८
कागज मसि ना कलम चलाई
फिर रवि ने विद्या पाई।।९
दीन दुखी की करते सेवा।
संत समागम पाते मेवा।।१०
रामानंद शिष बारह पावा।
रवी कबीरा धन्ना भावा।।११
निर्गुण ब्रह्म सकल गुणधामा।
सबके हृदय बसत इक रामा।१२
निर्गुण दर्शन भक्त विचारक।
संत समाजा के संचालक।।१३
प्रभु को चंदन आप बखाना।
खुद को उनका दास हि माना।१४
कड़ा परिश्रम खरी कमाई।
निराकार प्रभु दास कहाई।।१५
चित्तोड़ राज की झाला रानी।
देख प्रताप हो गई पानी।।१६
चरण छुये फिर भक्ती मानी।
गुरु के दर्शन अकथ कहानी।।१७
मेवाड़ी  महारानी  मीरा।
राणा की जो सहती पीरा।।१८
संत रवी को गुरू बनाया।
श्रद्धा भक्ति ज्ञान कमाया।।१९
गंगा ने भी मान बढ़ाया ।
हाथों से जब दान हि पाया।।२०
रवीदास ने दई सुपारी।
पंडित ने गंगा में डारी।।२१
भाव भक्ति मैया ने पाया।
तुरत सुपारी गले लगाया।।२२
सोने का इक कंगन दीना।
निर्मल मन के भाव प्रवीणा।२३
चरण पादुका आप बनाते।
मन में प्रभु का जाप चलाते।।२४
फोड़ कठौती गंगा आई।
रवि की महिमा जग ने गाई।।२५
 दुखिया मां का पूत जिवाया।
सेवा कर के फर्ज निभाया।।२६
भूखे शेर से मित्र बचाया।
चमत्कार से राज डराया।।३७
संत गुरू की ऐसी माया ।
कुष्ठ रोग से सेठ बचाया।।२८
संत शिरोमणि मुनि विज्ञानी।
गुरु ग्रंथ साहिब रवि बखानी।।२९
चालीस शबद  ग्रंथ समाये।
सिक्ख धरम में उच्च कहाये।।३०
रागसिरी अरु असा गुजारी।
गौरी सोरथ जेता सारी।।३१
सुही बिलावल गोंडा मारु।
धनस बसंता अरु मलहारु।।३२
रामकली  भाई  केदारा ।
सभी लेख गुरु ग्रंथ उचारा।।३३
करनी कथनी दोनों एका।
सादा जीवन कवियन लेखा।।३४
शाकाहारी धरम प्रवीणा।
सांचे वक्ता जग हित कीना।।३५
करम पुजारी मन से चंगा।
मानस तापस पल पल गंगा।।३६
सुमिरण ज्ञान गुरू सत्संगा।
सद्गुण धारण दुर्गुण भंगा।।३७
गंगा तट गुरु घाट बनाया।
बनी समाधि पार्क सुहाया।।३८
जयजयजय गुरुदेव प्रवीणा।
करत सहाय जगत आधीना।।३९
सद्गुरु सेवा दर्शन पाया।
कवि मसान चालीसा गाया।।४०

चौरासी के साल में, चैत्र चौथ का आन।

संत समागम ब्रह्म में, कहत हैं कवि मसान।।

23 गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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