श्री राम कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर के तीसरे दिन खेल जागरूकता अभियान

शि.वा.ब्यूरो, मुज़फ्फरनगर। आज श्री राम कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के सात दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस का शुभारम्भ स्वयंसेवकों द्वारा खेल शपथ लेकर गांव खेड़ी विरान बहादरपुर में किया गया। शिविर में लगभग 50 स्वयंसेवकों ने ग्रामवासियों को खेल एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया और उन्हें जीवन में खेल के महत्व को समझाते हुए बीमारियों से दूर रहने का एकमात्र माध्यम बताया। साथ ही स्वयंसेवकों ने गांव वालों को साफ सफाई के प्रति जागरूक किया। इसके पश्चात स्वयंसेवकों ने प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुर के प्रांगण में साफ सफाई की।


शिविर में आज के मुख्य अतिथि प्रमोद कुमार, विभागाध्यक्ष शारीरिक शिक्षा विभाग ने स्वयंसेवकों को बताया कि नियमित रूप से खेल खेलना हमें बहुत सी शारीरिक बीमारियों, विशेष रूप से अधिक वजन, मोटापा और हृदय रोगों से सुरक्षित रखता है। खेल हमारे शारीरिक और मानसिक व्यायाम केे लिए सबसे आसान और आरामदायक तरीका है। खेल बढ़ते हुए बच्चों के विकास के लिए बहुत ही आवश्यक है, क्योंकि इससे उनमें अच्छी आदतें और अनुशासन विकसित होता है। जब बच्चा खेल खेलता है तो वह खेल के नियमों का पालन करना सीखता है इन नियमों के द्वारा बच्चों में अनुशासन विकसित होने लगता है खेल हमारे मानसिक तनावों को कम करता है और साथ ही हमें सक्रिय बनाता है और हमें इससे ऊर्जा तथा ताकत मिलती है। खेल से हम फिट रहते हैं इसलिए यह किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना करने के लिए जीवन को भी शान्तिपूर्ण बनाता है।


इसके पश्चात शिविर में उपस्थित बायोसाइंस विभाग के प्रवक्ता डॉ विकास त्यागी ने बताया कि खेल हमारे अन्दर मित्रता की भावना को विकसित करता है और दो लोगों के बीच के सभी मतभेदों को हटाता है। खेल हमारी कार्य कुशलता, कार्य क्षमता को सुधारता है और मानसिक औैर शारीरिक रूप से थकान होने से भी बचाता है। खेलों के बारे में आमतौर पर कहा जाता है कि ‘‘एक स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन में ही बसता है’’। इसका अर्थ है कि जीवन में आगे बढ़ने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ मन का होना बहुंत ही जरूरी है। किसी भी महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उस पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए मानसिक और बौद्धिक स्वास्थ्य का होना बहुत आवश्यक है। खेल खेलना उच्च स्तर का आत्मविश्वास जगाता है।


इसके पश्चात कार्यक्रम अधिकारी अंकित कुमार ने बताया कि हम सोचते हैं कि खेलने से बच्चा पढ़ाई नहीं करेगा लेकिन हमें यह नहीं पता होता की खेल द्वारा बच्चे का मस्तिष्क एवं संपूर्ण शरीर स्वस्थ रहता है जिससे बच्चा पढ़ाई में और भी सक्रिय हो जाता है इसलिए हमें बच्चे को कम से कम एक घंटा जरूर खेलने देना चाहिए। खेल छात्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने का अभिन्न हिस्सा है। खेल और शिक्षा दोनों ही एक साथ जीवन में सफलता प्राप्त करने के सबसे अच्छे तरीके हैं।
शिविर के सफल संचालन में शारीरिक प्रशिक्षु सरिता, विपुल एवं हितेंद्र तथा स्वयंसेवक रिया गोयल, हर्ष सैनी, मोनिश, कुनाल, जावेद, अंशिका, अमन त्यागी, अभया, अभय तथा अजय कुमार इत्यादि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

Related posts

Leave a Comment