अधिशासी अधिकारी जयप्रकाश यादव सुपर, बाकी सब सिफर

शि.वा.ब्यूरो, खतौली। देहातों में एक पुरानी कहावत है, जो आज के आधुनिक परिवेश अभद्र लग सकती है, लेकिन इससे उसके मायनों में कोई फर्क नहीं पड़ता है। ये कहावत है-कुत्ते भौंकते रहते हैं, गाड़ी चलती रहती है। इसका सीधा सा मतलब है कि एैरा-गैरा कुछ भी कहते रहते हैं, बड़े लोग अपनी राह चलते रहते हैं, उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ता। प्रश्नगत मामले में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गाड़ी यानी बड़े लोग हैं और नगर पालिका सदस्य, चेयरमैन, जिलाधिकारी और नगरवासी एैरा-गैरा हैं। जो कुछ भी कहते रहते हैं, लेकिन अधिशासी अधिकारी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्हें जो कुछ भी करना होता है, वह करके रहते हैं। यू उनकी इस कार्यशैली के तमाम किस्से हैं, लेकिन ताजा मामले में उन्होंने एक बार फिर शासनादेश, चेयरमैन व अन्य सामान्य शिष्टाचार की बखिया उधेड़ कर रख दी हैं।
सूत्रों की मानें तो ताजा मामले के अनुसार नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी जय प्रकाश यादव ने अपने निजी कार्य के लिए अवकाश की स्वीकृति के लिए सक्षम प्राधिकारी के सम्मुख अर्जी दी थी, जिसे वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग व अन्य अपरिहार्य कारणों के चलते नामंजूर कर दिया गया था। इसके बावजूद अधिशासी अधिकारी मुख्यालय छोड़ने की अनुमति के बिना ही लम्बे अवकाश पर चले गये हैं। जय प्रकाश यादव की अनुपस्थिति में ईओ का कार्यभार देख रहे सफाई निरीक्षक से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अधिशासी अधिकारी अवकाश पर हैं और अगले माह तक ही आ पायेंगे।
इससे पूर्व खुद जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जेत्र ने नगर पालिका के एक अधिशासी अधिकारी को भ्रष्ट, लापरवाह और घोषित करते हुए विभागीय प्रमुख को उनके कार्यवाही के लिए पत्र लिख चुकी हैं, क्योंकि पालिका चेयरमैन ने ईओ के खिलाफ शासनादेशों का उल्लंघन करने, नियम विरूद्ध कार्य करने, जनहित के कार्यों में अडंगा डालने के आरोप लगाते हुए विभागीय मंत्री को पत्र लिखकर आरोपों की जांच करने की मांग की थी, जिसकी जांच आख्या के बाद जिलाधिकारी ने आरोपों के सही पाते हुए उक्त पत्र लिखा था। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा था कि जनहित एवं निकाय कार्य के हित में जयप्रकाश यादव का अधिशासी अधिकारी के पद पर बने रहना उचित नहीं है। इसके अलावा भी नगरवासी व पालिका वार्ड सदस्य ईओ की कार्यशैली को लेकर समय-समय पर शिकायते करते रहते हैं, लेकिन मामला ढाक के तीन पात जैसा ही है। जिलाधिकारी की संस्तुति के बावजूद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति समाप्त करके उसे मूल विभाग में भेजा जाना तो दूर जनपद से अन्यत्र ट्रांसफर तक नहीं किया जाना यूं ही नहीं है। जानकारों की मानें तो अधिशासी अधिकारी जय प्रकाश यादव का निकटतम एक रिश्तेदार नगर विकास विभाग में शासनस्तर पर ऊंच पद पर आसीन है, जिसकी शह पर अधिशासी अधिकारी जयप्रकाश यादव सुपर बाकी सब सिफर बने हुए हैं।
अब देखना हैं कि मुख्यालय छोड़ने की अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने, अपने वरिष्ठों की अवहेलना एवं ऐसे ही अनेक प्रकरणों में अधिशासी अधिकारी के खिलाफ शासन-प्रशासन क्या कार्यवाही करता है।
बता दें कि परिवार कल्याण विभाग में सामुदायिक केन्द्र हाटा जनपद कुशीनगर में सेवारत स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी जेपी यादव को 26 फरवरी 2019 में प्रतिनियुक्ति पर अस्थाई तौर पर स्वास्थ्य विभाग के जय प्रकाश यादव को नगर पालिका का अधिशासी अधिकारी नियुक्त किया गया था। सूत्रों की मानें तो श्री यादव अपने मूल विभाग में भी खासे चर्चित रहे हैं।

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