मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है

अतुल रघुवंशी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

बोल कड़वे हैं, तीखी ज़बान है।
मगर दिल में गहरी मिठास है।
गंगा जमुनी तहजीब शान इसकी।
ना कोई पर्दा, ना बनावट का लिबास है।
मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है।
दोआब की उपजाऊ माटी,
सरवट पुराना नाम है।
हड़प्पा के निशान बाकी आज भी।
इतिहास के पन्नों में जगह इसकी खास है।
मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है।
जड़ें कितनी पुरानी इसकी…
शुक्रतीर्थ वट वृक्ष जितना पुराना
शिव चौक है केंद्र बिंदु…
जिसकी परिधि में सबका वास है।
मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है।
रोजों में रौनक बढ़ती यहां पर।
कांवड़ में जोश हर कोई पाता है।
ईद की खुशियों में सेवइयां, यहां हर कोई खाता है।
यहां चर्च भी है, मंदिर, गुरुद्वारा भी है
ईदगाह और वहलने का मंदिर खास है।
मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है।
खेती किसानी किस्से कहानी, गांवों की गलियां, रिवायतें पुरानी।
हुक्के की गुड़गुड़, आज तक बरकरार है।
चीनी या गुड़ हो, छोटी मोटी बातों में चाहे अकड़ हो।
यहां का होने में फक्र और नाज है।
मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है।
अपराध पहचान रहा इसकी।
पर अब समय बदल रहा है।
सियासत की शह मात में दख़ल खूब इसका रहा है।
उद्योगों की बुलंदियों पर भी जाने का प्रयास है।
मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है।
सही बात पर अड जाना हो।
या अपने हक के लिए लड़ जाना हो।
लोगों का लहू यहां जल्दी खौलता है।
सुख दुःख में यहां दुश्मन भी बोलता है।
अंदाज़ लोगों के जीने का ज़रा बिंदास है।
मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है।
मुहब्बत के धागों को तोडने की कोशिशें हुई।
कई बार हमें बांटा भी गया।
शिकवों तल्खियों की खाई को पाटा भी गया।
सुकूं की ज़िन्दगी, यूपी 12 का गुमान और रिश्तों में विश्वास है।
मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है।
मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश 

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