आंगनबाड़ी कार्यकत्री सुनीता की मेहनत रंग लाई, आरोही को कुपोषण से उबारा

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। आरोही बच्ची तो छोटी है लेकिन इस बच्ची ने जंग बड़ी जीती है। आरोही की यह जंग सुपोषण के लिए थी, जिसे देखकर सुपोषण के लिए लगातार काम कर रहे लोगों का हौसला भी बढ़ा है। कुपोषण से बाहर आई इस बच्ची का हंसता खिलखिलाता चेहरा उसके परिवार के साथ ही हर उस दिल को सुकून से भर देता है, जिन्होंने सुपोषण के लिए अभियान चलाया हुआ है। वहीं जनपद में बच्चों और महिलाओं के कदम इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का नतीजा साफ दिख रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्री सुनीता गोयल का कहना है कि जिला अस्पताल में 22 अगस्त 2020 को जन्मी आरोही जन्म से ही काफी कमजोर थी। जन्म के समय उसका वजन 1.9 किलोग्राम था, काफी कमजोर होने के कारण छह दिन तक उसे मशीन में रखा गया। सात सितंबर 2020 को बच्ची को आंगनाड़ी केंद्र लाया गया और वजन किया गया। आरोही की हालत में कोई सुधार न होने पर उसे 10 जनवरी 2021 को आरोग्य मेला में उपचार के लिए भेजा गया, जहां चिकित्सक के परामर्श के अनुसार इलाज शुरू किया गया। इसके साथ-साथ मां का दूध पिलाने की भी सलाह दी गई, जिसके बाद बच्ची की हालत में सुधार हुआ और दो माह में बच्ची का वजन 5.8 किलोग्राम हो गया। आंगनबाड़ी सुनीता गोयल के माध्यम से जनपद के खालापार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) पर लगने वाले मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में आरोही को इलाज के लिए लाया गया। उस समय आरोही पांच माह की थी और उसका वजन मात्र 3.45 किलोग्राम था, जोकि कुपोषण की श्रेणी में आता है। दो माह तक आरोही का इलाज खालापार पीएचसी पर तैनात डा0 वरुण चैधरी के द्वारा किया गया और आंगनबाड़ी केंद्र पर लगातार आरोही की देखरेख के लिए खानपान, वजन आदि पर ध्यान दिया गया। दो माह के बाद आरोही का वजन 5.8 किलोग्राम हो गया है, जो कि सामान्य श्रेणी में है।
काशीराम आवास कालोनी में रहकर आरोही के पिता मोहित मेहनत मजदूरी करके अपनी आजीविका कमाते हैं और माता पिंकी गृहणी हैं। आरोही की एक बड़ी बहन है जो छह वर्ष की है। कुपोषण की जद में आई आरोही के माता-पिता ने हार नहीं मानी और लगातार आरोही के खान-पान एवं इलाज पर ध्यान दिया, जिसके परिणाम स्वरूप आरोही अब सुपोषण की श्रेणी में है। माना कि जिंदगी हर कदम एक नई जंग है, लेकिन हौसले जिंदगी जीने का तरीका बदल देते हैं। यह कहना है आरोही की मां पिंकी का। वह कहती हैं कि आरोही की हालत देखकर वह टूट गई थीं, लेकिन आंगनबाड़ी सुनीता गोयल की मदद से उनकी बेटी को एक नई जिंदगी मिली है। आरोग्य मेला के दौरान बेटी को दवा के साथ-साथ आंगनबाड़ी केन्द्र की मदद से पुष्टाहार मिला और समय-समय पर टीकाकरण भी किया गया। समय पर इलाज और पौष्टिक आहार से दो माह में आरोही ने जिंदगी की जंग जीती। अब पिंकी पूरी तरह स्वस्थ है।

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