पूनम चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

धवल चांदनी पूर्णिमा, चांदी जैसी रात।
सब जीवन सुख देत है,चंदा गयो प्रभात।।
पूनम चंदा लगता सुंदर।
सोलह आना पूरा मंदर।।१
बारह पूनम बारह मासा ।
बारह उत्सव श्वेत प्रकाशा।।२
जन जन हरषें जीव सुहाये।
ज्ञान दान कर संत कहायें।।३
रजत चाॅंद की चंचल किरणें।
तेज दौड़ती जैसे हिरणें।।४
पूनम भजते नारद शेषा।
सतनारायण कथा विशेषा।।५
पूनम चैत्र हनुमत आये।
राम लखन के काम बनाये।।६
खुशियां छाई मिली बधाई।
गदगद होती अंजनि माई।।७
सर्दी गर्मी कछु ना लागे ।
समय सुहाता सब दुख भागे।।८
मास बैसाखी पूनम आई ।
जन्में बुद्ध मिटी बुराई ।।९
राजपाट से मोह हटाया ।
पूनम के दिन ध्यान लगाया।१०
पूनम जन्मे पूनम ज्ञाना ।
पूनम के दिन किया पयाना।।११
जेठ मास की पूनम आई।
प्रगटे कबीरा संत कहाई।।१२
मात-पिता का पता न जाना।
निर्गुण ज्ञान दिया भगवाना।।१३
मास असाढ़ी पूनम आई।
वेद व्यास मुनि जन्में भाई।।१४
महभारत अरु भगवत गीता।
पुराण अठारा लिखें है मीठा।।१५
दक्ष प्रजापत  पूनम आये।
जग में मानव वंश चलाये।।१६
सावन पूनम राखी आई ।
संस्कृत दिवस मनाओ भाई।।१७
राजा बलि की कथा पुरानी।
सब बहिनों ने राखी मानी।।१८
भगिनी  रक्षा   करते  भाई।
बंधती राखी भेंट मिठाई ।।१९
रिमझिमरिमझिम पानी बरसे।
मिलते भ्राता बहिनें हरषें।।२०
भादों पूनम श्राद्ध कहाते।
पितरजनों को धूप चढ़ाते।।२१
ब्राह्मण काग नौत जिमाते।
खीर पुड़ी का भोग लगाते।।२२
शारद पूनम अश्विनि आती।
जाये वर्षा खुशियां लाती।।२३
राध कृष्ण ने रास रचाई।
छह माही सी रात बनाई ।।२४
देख चांदनी खीर बनाते ।
अमरत बरसे फिर हम खाते।२५
बाल्मीक भी इस दिन आये।
रामायण सा  ग्रंथ  रचाये।।२६
कार्तिक पूनम है सुखदाई ।
सतगुरु नानक जन्मे भाई।।२७
गुरु ग्रंथ की करूं बढ़ाई।
जिसकी महिमा जग में छाई।।२
चतुर्मास अब पूरण होते ।
साधु संत भी विचरण करते।।२९
अगहन पूनम ठंडी होती।
दिन तो छोटे रातें मोटी।।३०
शीत ऋतु में लगे सुहाई ।
गरमी लेते ओढ़ रजाई।।३१
पूनम पौषी शाकंभरि देवी।
जिन माता की घरघर  सेवी।।३२
माघ पूर्णिमा संत नहाते।
रवी दास का जन्म मनाते।।३३
गंग कठौती ला रैदासा।
पूरण भक्ति पर विश्वासा।।३४
हरिद्वारा में कुंभ नहाते।
गंगा के हम दर्शन पाते।।३५
फागुन पूनम होली आई।
उड़े गुलाला लाली छाई।।३६
राधा संग कृष्ण कन्हाई।
गोपी ग्वाला देत बधाई।।३७
जली होलिका जग हरषाया ।
भक्त प्रह्लाद आप बचाया।।३८
चंद्रग्रहण भी पूनम होता।
अंधियारे में सब जग खोता।।३९
पूनम का व्रत करें हमेशा।
पायें सब सुख मिटे कलेषा।।४०
पूनम उत्सव मानिये, कीजे सब शुभ काम।
तीरथ व्रत भी कीजिए, कहत हैं कवि मसान।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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