सहनशीलता की मिसाल

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

जापान के सम्राट यामातो के एक मंत्री ओ-चो-शान का परिवार सौहार्द के लिए बहुत मशहूर था। उनके परिवार में लगभग एक हजार सदस्य थे, परन्तु उनके बीच एकता का अटूट सम्बंध था। उसके परिवार के सभी सदस्य साथ साथ ही रहते और एकसाथ ही खाना खाते थे। इस परिवार के किस्से दूर दूर तक फैल गये। इस परिवार के सौहार्द की ये बात जब सम्राट यामातो तक भी पहुँची। सत्य की जाँच के लिए एक दिन सम्राट स्वयं अपने इस बुजुर्ग मंत्री के घर आ पहुँचे।
स्वागत-सत्कार और शिष्टाचार की रस्में पूरी होने के बाद, सम्राट यामातो ने पूछा-ओचोसान! मैंने आपके परिवार की एकता और मिलनसारिता की ढ़ेरों कहांनियां सुनी है। क्या आप बतायेंगे कि एक हजार सदस्यों वाले आपके परिवार में यह सौहार्द और स्नेह सम्बंध आखिर किस तरह से बना हुआ है? ओचोसान वृद्धावस्था के कारण ज्यादा देर तक बात नहीं कर सकते थे, इसलिये उसने अपने पौत्र को संकेत से कलमदावात और कागज लाने को कहा। जब पौत्र वह चीजें ले आया तो मंत्री ने अपने काँपते हांथो से करीबन सौ शब्द लिखकर कागज सम्राट की ओर बढ़ा दिया। सम्राट यामातो अपनी जिज्ञासा को दबा न पाये, उन्होंने फौरन उसे पढ़ा और चकित रह गये।
दरअसल मंत्री ने उस कागज पर सौ बार एक ही शब्द को लिखा था और वह शब्द था सहनशीलता। सम्राट को अवाक् देख मंत्री ने कांफती आवाज में कहा-मेरे परिवार का सौहार्द रहस्य सिर्फ इसी सहनशीलता में छिपा है। यही महामंत्र हमारी एकता का मूलमंत्र है। परिवार और समाज को एकता के धागे में सदा पिरोये रखें।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ

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