फिर मिलते हैं

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

कई वर्षों के बाद वह ऑफिस के काम से आगरा आया हुआ था। काम तो एक दिन पहले ही निपट गया, पर वह अपने कॉलेज वाले दोस्तों से एक मुलाकात करना चाह रहा था। वैसे तो  फेसबुक पर दोस्तों के क्रियाकलाप देखता रहता था और कभी-कभी ऑनलाइन मिलने पर उनसे मैसेंजर में चैट भी करता, लेकिन आभासी और वास्तविक दुनिया में बहुत अंतर है। सोचा, आज फेस टू फेस बैठकर पुरानी यादें ताजा करेंगे। दोस्तों से मिलने की चाहत में आठ-दस दोस्तों को फोन मिला चुका था, पर सभी व्यस्त थे। कोई शादी में, कोई काम में, कोई बाहर था। ‘फिर मिलते हैं’ के आश्वासनों को साथ लेकर वह वापस अपने वर्तमान शहर की ओर लौट चला … ।
ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा

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