वैकल्पिक विवाद समाधान, मध्यस्थता व लोक अदालत के लाभ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित 

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त कलेन्डर के अनुसार जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजीव शर्मा केे निर्देशन में कोविड-19 के सम्बन्ध में उच्च न्यायालय व सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की और से दीन दयाल लाॅ कालेज में वैकल्पिक विवाद समाधान, मध्यस्थता एवम् लोक अदालत के लाभ से सम्बन्धित विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोगी ने छात्र एवम् छात्राओं को मध्यस्थता के बारे मे बताया कि मध्यस्थता द्वारा विवादो को निपटालेने की प्रक्रिया भारत में पुरातन समय से चली आ रही है। पंचों के द्वारा मामले का निपटारा करना इसी का तरीका है। मध्यस्थ विवाद के पक्षकारों के मध्य सेतू का कार्य करता है। उनके विवादों को सुलझाकर उन्हे पुनः एक दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने में सहायता करता है। सलोनी रस्तोगी ने बताया कि सर्व प्रथम मध्यस्थ धैर्य पूर्वक सुनता है और तब पक्षकारों के बीच समझौता कराने का प्रयास करता है। मध्यस्थ एक तटस्थ व्यक्ति होता है, जो विवाद के दोनो ही पक्षों के प्रति समभाव रखते हुए उन्हे विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया की वैकल्पिक विवाद निस्तारण (एडीआर) के अन्तर्गत पक्षकारों को अपने विवाद के निपटारे हेतु ऐसा तटस्थ मंच उपलब्ध होता है, जो उनके लिए सुविधाजनक होता है, क्योकि इसकी प्रक्रियात्मक कार्यवाही अपेक्षाकृत सस्ती, अविलम्बकारी, लचीली तथा समर्थकारी होती है। (1) मध्यस्थ,(2) सुलह,(3) न्यायिक निपटारे, जिसमें लोक अदालत के माध्यम से निपटारा शामिल हैं या (4) पंचाट आता है। इसके अन्तर्गत भारतीय संविधान की प्रस्तावना, अनुच्छेद -14, 38,39ए, मे अन्तर्निहित सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, न्याय तथा शीध्र व जरूरतमन्दों के लिए सस्ता व सुलभ न्याय की संकल्पना को साकार करने हेतु सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 89 व आदेश 10 नियम 1ए, 1बी, व 1सी, वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्था के सम्बन्ध में प्रावधान करती है। सलोनी रस्तोगी ने बताया कि वैश्वीकरण के इस युग में देश की बहुमुखी प्रगति सामाजीक, आर्थिक, ओद्योगिक तथा वाणिज्यिक विकास के अधिकारों के प्रति जागरूकता,के कारण, न्यायालय में सिविल, अपराधिक,राजस्व एवम् ओद्योगिक, पारीवारिक वादों संख्या इतनी अधिक बढती जा रही है कि न्यायालय में लम्बित मामलों के निस्तारण में अत्यन्त विलम्ब हो जाता है तथा परिणाम स्वरूप समय व धन, का भी व्यय होता है। ऐसी परिस्थितियों में वैकल्पिक विवाद समाधान की व्यवस्था कारगर सिद्ध हो रही है। वैकल्पिक विवाद समाधान के अन्तर्गत न्यायालय से इतर विकल्पों के माध्यम से विवादों के निपटारे का प्रयास किया जाता है, जिसमे पक्षकारों से सुलभ सस्ता व शीध्र  न्याय मिल सकें तथा न्यायालयों मे लम्बित मामलों की संख्या में कमी आ सकें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने बताया की आर्थिक रूप से अक्षम व्यक्तियो को यदि वे अपने मुकदमें की पैरवी करने में असमर्थ है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निः शुल्क अधिवक्ता प्रदान किया जायेगा। शिविर में उपस्थित छात्र एवम् छात्राओं को संविधान में किये गये मौलिक कृतव्यों की भी जानकारी दी गई। उन्होंने कोविड-19 के बचाव के उपाय के सम्बन्ध में सभी को जागरूक किया। सदस्य किशोर न्याय बोर्ड बीना शर्मा ने विभिन्न हैल्पलाईन नम्बरों की जानकारी छात्र-छात्राओं दी तथा मध्यस्थता का महत्व बताया। इस अवसर पर एडवोकेट विजय अनेजा, कमलेश, गीता अनेजा, डा0 राज कुमार त्यागी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने अवगत कराया कि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 10 अप्रैल दिन द्वितीय शनिवार को दीवानी न्यायालय परिसर व वाहृय न्यायालय बुढाना कलक्ट्रेट में किया जायेगा, जिसमें आपराधिक, 138 एन0 आई0 एक्ट, बैक रिकवरी, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिका, टेलीफोन, बिजली एवम् पानी के बिल, वैवाहिक वाद, भूमि अधिग्रहण, राजस्व वाद, तथा सिविल वादों का निस्तारण किया जायेगा।

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