आया वसंत

नरेंद्र कुमार शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

आया वसंत हुई खुशियां अनंत,
सर्दी से थी जो ठिठुरन अब उसका भी हुआ अंत।
आया वसंत———

धरती पर फैली थी वो सफेद चादर बर्फ़ की, अब उसका भी हुआ है अंत।
दुबके थे वो पशु पक्षी, अब पक्षियों की उड़ान भी हुई अनंत।।
आया बसंत———

कैसे रची है उसने सृष्टि, रचयिता की माया भी है बेअंत।
प्रभु तेरी लीला है बड़ी न्यारी, ऐसा कहते हैं साधु संत।।
आया वसंत———

मन्दिर में बजती थीं चौघडिया, अब उसका भी हुआ है अंत।
सूर्य का ताप बढ़ा, अब तरुवर लदे, प्रकृति ऐसे लगे जैसे कोई महंत।।
आया वसंत———

शिमला हिमाचल प्रदेश

Related posts

Leave a Comment