शिवपुराण से……. (278) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता (प्रथम सृष्टिखण्ड़)

भगवान् शिव का कैलास पर्वत पर गमन तथा सृष्टिखण्ड़ का उपसंहार

गतांक से आगे………..

उस समय भगवान् शिव ने विश्वकर्मा को उस पर्वत पर निवास स्थान बनाने की आज्ञा दी। अनेक भक्तों के साथ अपने और दूसरों के रहने के लिए यथायोग्य आवास तैयार करने का आदेश दिया।
मुने! तब विश्वकर्मा ने भगवान् शिव की आज्ञा के अनुसार उस पर्वत पर जाकर शीघ्र ही नाना प्रकार के गृहों की रचना की। फिर श्रीहरि की प्रार्थना से कुबेर पर अनुग्रह करके भगवान् शिव सानन्द कैलास पर्वत पर गये। उत्तम मुहूर्त में अपने स्थान में प्रवेश करके भक्तवत्सल परमेश्वर शिव ने सबको प्रेमदान दे सनाथ किया, इसके बाद आनन्द से भरे हुए श्रीविष्णु आदि समस्त देवताओं, मुनियों, और सिद्धों ने शिव का प्रसन्नतापूर्वक अभिषेक किया। हाथों में नाना प्रकार की भेंटे लेकर सबने क्रमशः उनका पूजन किया और बड़े उत्सव के साथ उनकी आरती उतारी। मुने! उस समय आकाश से फूलों की वर्षा हुई, जो मंगलसूचक थी। सब ओर जय-जयकार और नमस्कार के शब्द गूंजने लगे। महान् उत्साह फैला हुआ था, जो सबके सुख को बढ़ा रहा था। उस समय सिंहासन पर बैठकर श्रीविष्णु आदि सभी देवताओं द्वारा की हुई यथोचित सेवा को बारंबार ग्रहण करते हुए भगवान् शिव बड़ी शोभा पा रहे थे। देवता आदि सब लोेगों ने सार्थक एवं प्रिय वचनों द्वारा लोक कल्याणकारी भगवान् शंकर का पृथक-पृथक स्तवन किया। सर्वेश्वर प्रभु ने प्रसन्नचित्त भाव से वह स्तवन सुनकर उन सबको प्रसन्नता पूर्वक मनोवांछित वर एवं अभीष्ट वस्तुएं प्रदान की।

(शेष आगामी अंक में)

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