क्षेत्र में बहुमुखी समृद्धि लायेगा बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे

शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सड़के रीढ़ का काम करती है। सड़कों के निर्माण होने से सम्बन्धित क्षेत्र का विकास बड़ी तेजी के साथ होता है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र उत्तर प्रदेश का ऐसा क्षेत्र रहा है, जहाँ त्वरित आवागमन का अभाव रहा है। पथरीला क्षेत्र होने के कारण क्षेत्र वासियों को कई तरह की कठिनाई आती रही। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने बुन्देलखण्ड के विकास के लिए विशेष पैकेज दिये और इस क्षेत्र में सिंचाई के लिए जहां बाधों, नलकूपों व तालाबों का निर्माण कराया है, वही पेयजल परियोजनायें पूर्ण कर ग्रामवासियों को जल आपूर्ति की जा रही है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सर्वागींण विकास के लिए प्रदेश सरकार द्वारा बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराना प्रदेश सरकार द्वारा बुन्देलखण्ड वासियों को बहुत बड़ा तोहफा दिया गया है, जिसे उस क्षेत्र की आने वाली पीढ़ी सदैव याद रखेगी। यह एक्सपे्रस-वे बुन्देलखण्ड के चित्रकूट, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन से गुजरते हुए औरैया व जनपद इटावा में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे में मिलेगा।

विकास का पहिया बना बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे

प्रदेश सरकार बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विकास के लिए कृत संकल्पित है। बुन्देलखण्ड  वासियों की हर क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि और विकास करना सरकार का ध्येय हैै। इस क्षेत्र के विकास के लिए जितना ध्यान वर्तमान सरकार ने दिया है, उतना पूर्व में किसी ने नही दिया। बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण का शुभारम्भ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 फरवरी 2020 को चित्रकूट में किया गया। यह एक्सप्रेस-वे 296 किमी लम्बा होगा। यह चित्रकूट बाँदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन औरेया होते हुए इटावा जनपद में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे में मिलेगा। इस एक्सप्रेस-वे की लागत लगभग 15 हजार करोड़ रू0 है। अभी यह फोर लेन का होगा जिसे आगे चलकर 6 लेन में भी बनाया जायेेगा। इसमें चार रेलवे ओवर ब्रिज, 14 बड़ेपुल, सात रैम्प प्लाजा, 268 छोटेपुल, 18 फ्लाई ओवर और 214 अन्ड़रपास बनेंगे। इस एक्सप्रेस-वे कोे 3 वर्ष में बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। इस एक्सप्रेस वे के बनने से बुन्देलखण्ड के 138 ग्राम और औरेया व इटावा के 44 ग्रामों का सीधा जुड़ाव होगा।

किसानों को होगा सबसे अधिक फायदा

बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के बनने से बुन्देलखण्ड क्षेत्र के किसानों को बहुत लाभ मिलेगा। किसानों को उनकी उपज की फसलें मण्डियों तक पहुँचाने में शीध्रता होगी। स्थानीय फसल, फल, फूूल, सब्जियाँ, दूध आदि जल्द खराब होने वाली फसलों को बाजारों, मण्डियों तक पहुँचने में शीध्रता होगी और ताजी होने पर सही मूल्य भी मिलेगा। यदि किसान अपनी उपज को बाहर की मण्डियों, शहरों में बेचना चाहेगा तो उसका भी उसे फायदा मिलेगा। किसानों को खेती किसानी करने के लिए आवश्यक बीज, खाद आदि भी समय से मिलते रहेगें। किसानों को उनकी फसल का वाजिब मूल्य मिलेगा जिससे उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी।

पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

सांस्कृतिक विविधता के बावजूद बुन्देलखण्ड अपनी एकता और आपसी भाई चारे के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से बुन्देलखण्ड समृद्ध है। बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के बनने से पर्यटकों को देखने के लिए झाँसी का किला, ओरछा का किला, चतुर्भुज का मन्दिर, जहाँगीर महल, ओरछा वन्य जीव अभ्यारण, मध्य प्रदेश में पड़ने वाला खजुराहो आदि नजदीक पड़ेगें। कालिजंर का किला, चित्रकूट धाम, भरतकूप, राजापुर, कालपी, महोबा, उरई, बटेश्वर आदि ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को देखने, दर्शन करने के लिए पर्यटक आकर्षित होगें। इस एक्सप्रेस-वे के बनने से बुन्देलखण्ड पर्यटन का हब बनेगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोककला, लोकसंस्कृति, दस्तकारी आदि को बढ़ावा मिलेगा और लोगों की आर्थिक प्रगति के साथ ही रोजगार भी मिलेंगे।

स्थानीय उत्पाद एवं रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण से स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनने में बहुत मदद मिलेगी। आवागमन की अच्छी सुविधा होने पर क्षेत्रीय युवकों को स्वरोजगार के लिए दूर नहीं जाना होगा। स्थानीय स्तर पर उत्पादित विभिन्न खाद्यान्न वस्तुओं के साथ-साथ स्थानीय हस्तकला, दस्तकारी, लोककला, पत्थर की मूर्तियाँ आदि को बढ़ावा मिलेगा। जो व्यक्ति सड़कों के किनारे विभिन्न तरह के खान-पान के लिए दुकानें रेस्टोंरेंट, होटल, ढाबा, वाहन मरम्मत, इलेक्ट्रानिक्स सामानों, स्थानीय खाद्य वस्तुओं, कृषि उपज स्थानीय लोककला के बर्तन-वस्त्र आदि बेचने की दुकानें खोलकर अपना धन्धा शुरू करेंगे, उन्हें अच्छा लाभ होगा। लोगों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना होंगा। इसके साथ ही एक्सपे्रस-वे के किनारे एवं औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योगों, फैक्टरियों आदि में भी कुशल, अकुशल श्रमिकों, तकनीशियनों, प्राविधिक शिक्षा प्राप्त युवाओं को नौकरिंयों मिलेंगी।

ईधन की खपत व प्रदूषण में कमी होगी

बुन्देलखंड एक्सप्रेस के बनने से वाहनों की गति में तेजी आयेगी और वाहन घूमकर ज्यादा रास्ता तय कर अपनी मंजिल पर पहुॅचने के बजाय एक्सप्रेस-वे से उनकी मंजिल कम होगी और शीघ्र गन्तब्य तक पहॅुचेगें। इससे वाहनों के ईधन में कमी आयेगी और वाहनों के ईधन में कमी से पैसा भी बचेगा। अच्छी और गुणवत्तायुक्त सड़क से चलने पर ईधन की खपत कम होती है। ज्यादा दूरी तक वाहन चलाने व जाम की समस्या होने पर वाहनों से ज्यादा धुआ निकलता है, इससे प्रदूषण बढ़ता है, किन्तु एक्सप्रेस-वे से कहीं जाम व गति में धीमापन न होने से प्रदूषण कम होगा। साथ ही सड़क किनारे वृक्षारोपण भी होगा, इससे प्रदूषण और कम होगा।

देश-प्रदेश के अन्य एक्सप्रेस-वे से कनेक्टिविटी का खुलेगा रास्ता

बुन्देलखंड एक्सप्रेस-वे के निर्माण से पूरा बुन्देलखंड क्षेत्र देश व प्रदेश की राजधानियों सहित अन्य प्रदेशों से भी सीधें जुड़ जायेगा। दिल्ली की दूरी जो आज चित्रकूट से 10 से 12 धन्टे पहुॅचने का समय लगता है वह कम होकर 5 घंटे हो जायेगा। बुन्देलखंड एक्सपे्रस-वे लखनऊ-आगरा एक्सपे्रस-वे में मिलेंगा, फिर यह पूर्वाचंल एक्सप्रेस-वे आगरा-नोएडा यमुना एक्सप्रेस-वे बन रहे गंगा एक्सप्रेस-वे में तथा कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, आगरा प्रयागराज जेवर आदि एयरपोर्ट सहित प्रदेश व देश के समस्त एक्सप्रेस-वे से सीधे जुड़ जायेगा, इससे आवागमन एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में शीघ्रता होगी।

उद्योगों, प्रौद्योगिकी, तकनीकी, मेडिकल आदि शिक्षण संस्थाओं का होगा निर्माण

बुन्देलखंड एक्सप्रेस-वे के निर्माण से प्रदेश और देश की कनेक्टिविटी सीधे हो जायेगी। एक्सप्रेस-वे के किनारों पर उद्योगों, फैक्टरियों की स्थापना होगी उनकी स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता है। उद्योगों की स्थापना से क्षेत्र का विकास होगा और लोगों को रोजगार मिलेगा इससे उनकी आर्थिक प्रगति होगी। प्रदेश सरकार द्वारा बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के साथ डिफेन्स इण्डस्ट्रियल काॅरिडोर परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के किनारो पर विभिन्न प्रौद्योगिकी, तकनीकी एवं मेडिकल एवं स्वास्थ्य सेवाओं आदि के शिक्षण संस्थानों की स्थापना होगी। इन शिक्षण संस्थानों की स्थापना से छात्र-छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने में आसानी होगी, उन्हें दूर नहीं जाना होगा, और अभिभावकों की आर्थिक बचत होगी। साथ ही स्थानीय लोगों को नौकारियाँ व रोजगार मिलेंगे।

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