दो दिवसीय कथित राष्ट्रीय अधिवेशन में नन्द कुमार (बघेल) पटेल को राष्ट्रीय अध्यक्ष को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित करने की औपचारिकता पूरी

शि.वा.ब्यूरो, नई दिल्ली। भले ही लोग ईमानदारी का ढ़ोल पीटते नहीं थकते हों और सारा काम पारदर्शिता से करने का दावा करते हों, लेकिन जब सत्ता हथियाने की बात आती हो, तो सारे दावे हवा-हवाई हो जाते हैं। फिर मामला चाहें सरकार चुनने का हो या समाज की ठेकेदारी चुनने का। अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के मामले में भी यही हुआ। 30-31जनवरी 2021 को सरदार पटेल स्मारक वाराणसी में आयोजित महासभा के राष्ट्रीय अधिवेशन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश पटेल के पिता नन्द कुमार पटेल को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया। सबसे बडी बात कि चुना किसने? आस-पास कुछ समर्थक एकत्रित हुए और बस कर दी घोषणा कि नन्द कुमार पटेल कुर्मी समाज के नये ठेकेदार। पहली बात तो ये कि राजनीतिक पृष्ठभूमि के किसी व्यक्ति को समाज का अगुवा बनाना ही समाज के साथ अन्याय करना होगा, क्योंकि हर समाज में हर राजनीतिक दल के समर्थक हो सकते हैं और यदि संगठन का मुखिया ही किसी राजनीतिक दली से प्रेरित होगा तो वह सभी को कैसे साथ लेकर चल सकेगा।


दूसरी बात जब किसी पद पर चुनाव ही होना है तो उसमें पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती जानी चाहिए। किसी भी पद पर चुनाव लड़ने के लिए सभी को स्वतंत्रता और मौका दिया जाना चाहिए। चुनाव की व्यवस्था ऐसी हो, जिसमें समाज के अधिकांश तबका भाग ले सके। आज के तकनीकी युग में यह असम्भव नहीं है। इसके लिए कोई अधिकृत वेबसाईट अथवा अन्य किसी ऐसे माध्यम का सहारा लिया जा सकता है, जिसमें सभी को वोट डालने का अवसर प्राप्त हो सके और वे अपने समाज के मुखिया का चुनाव करने में सहभागी हो सकें। समाज के एक बुद्धिजीवी कर्नल एसएन कटियार भी ऐसे ही विचारों के समर्थक हैं।
इसके साथ ही अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए कम से कम समाज के उत्थान में उसकी भागीदारी का न्यूनतम मानक भी तय किया जाना चाहिए। इससे कम से कम इतना तो होगा कि इस पद तक पहुंचने की इच्छा रखने वाले लोगों में समाज हित में कार्य करने की स्वप्रेरणा प्राप्त होगी और समाज का मुखिया बनने वाले व्यक्ति में मूल स्वभाव में समाजसेवा निहित होगा। अब अपने समर्थकों के बीच में बैठकर जो चाहे समाज का मुखिया घोषित कर दे, इससे समाज का भला होने वाला नहीं। इससे तो समाज के बचे-खुचे मूल्य भी रसातलवासी हो जायेंगे और हम सभी को ऐसा नहीं होने देने के लिए भरसक प्रयास करने चाहिए।

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