उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर ग्लेशियर टूटने से यूपी में गंगा नदी के किनारे वाले जिलों में हाई अलर्ट

शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर ग्लेशियर टूटने से हुई भारी तबाही के चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सभी जिलाधिकारी हाई अलर्ट पर रखा गया हैं। गंगा नदी के किनारे वाले जिलों मुज़फ्फरनगर, बिजनौर, बदायूं के साथ ही हापुड़, फर्रुखाबाद, कानपुर, प्रयागराज व वाराणसी के जिलाधिकारियों से राहत आयुक्त ने सम्पर्क करने के साथ ही मुस्तैद रहने का दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। उत्तराखंड में ऋषिगंगा नदी पर पावर प्रोजेक्ट के बांध का एक हिस्सा टूटने की सूचना पर उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे पर बसे गांव तथा शहरों में हाईअलर्ट घोषित किया गया है।

बता दें कि उत्तराखंड में चमोली जिले के रेणी गांव के पास ग्लेशियर ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही हुई है। प्रशासन की टीम मौके पर हैं। इस त्रासदी में ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले करीब 50 लोग लापता बताए जा रहे हैं। आईटीबीपी, SDRG के जवान बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। हरिद्वार, ऋषिकेष और श्रीनगर में अलर्ट जारी है। धौलीगंगा ग्लेशियर की तबाही के साथ तपोवन में बैराज को भी भारी नुकसान की सूचना है। अभी तक स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो हो पाई है कि इस तबाही में कितना नुकसान हुआ है। घटना सुबह आठ से नौ बजे के बीच की है। ये ग्लेशियर चमोली होते होते हुये ऋषिकेश तक पहुंचेगा। ग्लेशियर फटने से अलकनंदा और धौली गंगा उफान पर है। पानी के बहाव में कई घरों के बहने की आशंका है। आस-पास के इलाके खाली कराए जा रहे हैं। लोगों से सुरक्षित इलाकों में पहुंचने की अपील की जा रही है।

ज्ञात हो कि ग्लेशियर घाटी में धीरे-धीरे चलती हिमराशि या हिमनदी को कहते हैं। ये पृथ्वी की सतह पर विशाल आकार की गतिशील हिमराशियां होती हैं, जो अपने भार के कारण पर्वतीय ढलानों पर नीचे की ओर होती हैं। इसकी उत्पत्ति ऐसे बर्फीले इलाकों में होती है, जहाँ हिमपात की मात्रा हिम के पिघलने की दर से अधिक होती है और प्रतिवर्ष बर्फ की एक बड़ी मात्रा अधिशेष के रूप में जमा होती रहती है। वर्ष दर वर्ष बर्फ के जमा होने से निचली परतों के ऊपर दबाव पड़ता है और वे सघन हिम के रूप में परिवर्तित हो जाती हैं। यही सघन हिमराशि ढलान पर निचे कि ओर बहती रहती है। यह हिमखंड नीचे आकर पिघलता है और पानी मे परिवर्तित हो जाता है। साधारणत: हिमनदी रचना के लिए बर्फ की सौ से दो सौ फुट मोटी परतों का जमा होना अनिवार्य शर्त है। इतनी मोटाई पर दबाव के कारण बर्फ़ हिमनदी में परिवर्तित हो जाती है।

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