विधिक सेवा प्राधिकरण व श्री राम काॅलेज ऑफ़ लाॅ के संयुक्त तत्वाधान में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। विधिक सेवा प्राधिकरण और श्री राम काॅलेज ऑफ़ लाॅ के द्वारा संयुक्त रूप से एक विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया, जिसका विषय  The Child Rights in India with special emphesis of POCSO Act 2012 रहा। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि सिविल जज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोगी, बतौर विशिष्ठ अतिथि चौधरी हरचन्द सिंह काॅलेज ऑफ़ लाॅ खुर्जा के प्राचार्य डाॅ. रविन्द्र प्रताप सिंह, श्री राम काॅलेज के निदेशक डाॅ0 आदित्य गौतम एवं श्री राम काॅलेज की प्राचार्य डाॅ0 प्रेरणा मित्तल मुख्य रूप से उपस्थित रहें। मुख्य अतिथि सलोनी रस्तोगी सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रवज्जलित कर कार्यक्रम का आरम्भ किया।
विषय के संबंध में छात्र शशांक अग्रवाल ने पीपीटी प्रजेन्टेशन के माध्यम से बाल अपराधों के कारण और निवारण पर प्रकाश डाला। छात्र आर्यन राठी ने कहा कि आज के समाज में बाल उत्पीडन की समस्या बढ़ गयी है, इसके लिए ही भारत में 2012 में पोक्सो अधिनियम पारित किया गया था। छात्रा समरीन ने कहा कि आज के बालक कल के नागरिक है, उन्ही के कंधों पर कल के भारत का भार है। छात्रा तबस्सुम ने कहा कि लोकतंत्र को विश्व की सबसे अच्छी शासन प्रणाली के रूप में जाना जाता है। छात्र जुनैद ने कहा कि बच्चों के प्रति अपराध ही नही, वरन बच्चों के द्वारा भी अपराध बढ़ रहे है। दिव्या सिंघल ने कहा कि नारी को आज भी हर एक क्षेत्र में समानता का अधिकार नही मिल पाया है। कुछ कानून है, जिन्हें  आज भी बदले जाने आवश्यक है।


कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सलोनी रस्तोगी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 (3) एवं 21 के अंतर्गत बच्चों के संरक्षण तथा पोक्सो अधिनियम 2012 के विषय में कहा कि शिक्षा एवं नैतिकता की कमी से बच्चों का शोषण बढ़ रहा है। अपराध के लिए समुचित और समयबद्ध दण्ड का प्राविधान न्यायप्रिय और लोकतान्त्रिक समाज का लक्षण है। सलोनी रस्तोगी ने बताया कि हमारे देश में 18 वर्ष से कम आयु के 472 मिलियन से अधिक बच्चे है, जो कि कुल जनसंख्या का 40 प्रतिशत है। यह वर्ल्ड चाइल्ड पोपुलेशन का 20 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन जीने का अधिकार प्रदत्त करता हैे, जो बच्चों को गर्भ से ही प्राप्त हो जाता है। अर्थात गर्भाव्यस्था में उचित पोषण  व चिकित्सीय सुविधा का अधिकार तथा भ्रूण हत्या के विरूद्ध अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि अनच्छेद 21-ए  6 से 14 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है, जिसको लागू करने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लाया गया है। अनुच्छेद 23 शोषण के विरूद्ध तथा अनुच्छेद 24 बालश्रम के विरूद्ध बच्चों को अधिकार प्रदान करता है। सलोनी रस्तोगी ने कहा कि बच्चों के विरूद्ध बढ रहे अपराधों को रोकने के लिए पोस्को एक्ट, अर्थात बालको के विरूद्ध यौन अपराधो से संरक्षण अधिनियम 2012 पारित किया गया है, जिसमें बच्चों के विरूद्ध होने वाले लैगिक अपराधों के लिए 3 वर्ष के कारावास से लेकर मृत्यु दण्ड तक का प्रावधान किया गया है।

सिविल जज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने कहा कि प्रोर्नोग्रैफी के लिए बच्चों के दोहन करने को भी दण्डित किया गया है। उक्त मामलों के शीध्र निस्तारण हेतु विशेष न्यायालयों का गठन किया गया है। देश के बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास, पोषण, शिक्षा तथा उनके विरूद्ध अपराधों को रोकने के लिए, बच्चों के सुरक्षित तथा स्वस्थ वातावरण प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न कानून बनाये गये है व योजनाए चलायी जा रही है, लेकिन बच्चे हमारे समाज व देश का भविष्य है। उनके अधिकारों को सुरक्षित रखना तथा उन्हे  स्वस्थ व सुरक्षित वातावरण प्रदान करना हम सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है। माता – पिता व परिवार बच्चों के खान पान, पोषण पर ध्यान दे। वे उनके साथ अधिक से अधिक समय बिताये जिससे बच्चे मानसिक व भावनात्मक रूप से सशक्त हो। बच्चों की शिक्षा व स्वास्थय को प्राथमिकता पर रखें। सलोनी रस्तोगी ने बताया कि बच्चों को बैड टच व गुड के बारे में बताये तथा बताये कि किसी भी अपरिचित व्यक्ति की बातो पर विश्वास न करें। इन्टरनेट व सोशल मीडिया का प्रयोग नियंत्रित रखे, जिससे की दुरूपयोग न हो तथा किसी घटना का शिकार न हो सकें। सलोनी रस्तोगी ने बताया कि आर्थिक रूप से अक्षम व्यक्तियो को यदि वे अपने मुकदमें की पैरवी करने में असमर्थ है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निः शुल्क अधिवक्ता प्रदान किया जायेगा।

डा0 आदित्य गौतम ने कहा कि बच्चे राष्ट्र की धरोहर है। बच्चों के साथ होने वाले अपराध उनके जीवन दशा को खराब कर देते है, जिससे उनके व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नही हो पाता। माता पिता बच्चों को अधिक से अधिक भावनात्मक एवं मानसिक सहयोग देकर उन्हे अपराध का शिकार होने से बचा सकते है। प्रवक्ता आँचल अग्रवाल ने कहा कि बच्चे राष्ट्र की धरोहर है किसी भी देश की असली सम्पत्ति वहाँ के बच्चे तथा युवा ही है। बच्चों के विकास से न केवल उनका अपितु समाज तथा राष्ट्र का भविष्य जुड़ा है। बालको की उपेक्षा से समाज को नुकसान है। बालकों के विकास को ध्यान में रखते हुए उन्हे कानून मे अधिकार दिये गये है। इससे पूर्व समस्त अतिथियों को फूलो का गुलदस्ता देकर सभागार में स्वागत किया गया। मंच का संचालन प्रवक्ता आँचल अग्रवाल ने किया।

कार्यक्रम के अन्त में डा0 आदित्य गौतम एंव डा0 प्रेरणा मित्तल द्वारा मुख्य अतिथि सलोनी रस्तोगी को प्रतीक चिन्ह भेट किया गया। श्री राम काॅलेज ऑफ़ लाॅ की विभागाध्यक्ष पूनम शर्मा के द्वारा समस्त अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर प्रवक्तागण संजीव कुमार, सोनिया गौड, अनुज, मौ0 आमिर, कोमल मिश्रा व त्रिलोक का सराहनीय योगदान रहा ।

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