हिमाचल में बम्पर बर्फवाती से बिछी चांदी सी सफेद चादर

डॉ जगदीश शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हिमाचल प्रदेश जिला मण्डी पांगणा चांदी  सा चमक उठा। सर्दी का मौसम आते ही सभी की तमन्ना बर्फ के बिछौने पर अठखेलियां करने की होती है। बर्फ के बाहों का गिरना, बर्फ के गोले बनाकर एक दूसरे पर फेंकना, बर्फ के बुत बनाना, बर्फ पर फिसलने का उल्लास निराला ही होता है। हिमालय प्रदेश के पहाड़ी भागों में किसानों बागबानो के लिए बर्फ खाद के तुल्य है। ऐसे में बर्फ गिरने पर पहाड़ के निवासी किसान बागवान खुशी से फूले नहीं समाते।
“हीऊँए लगी रुण झुण” जैसे बर्फ पड़ने पर गाए जाने वाले गीत  मात्र मनोरंजन का उत्पादन ही नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ी अनेक आस्थाओं को जानने का बुनियादी आधार भी है। संक्रमण के दौर में ऋतु संबंधी गीत गाने वाले अब विरले ही मिल पाते हैं। सर्दी की लंबी रातों में बर्फबारी से बिजली गुल होने पर लोक कथाएं आज भी नितांत पिछड़े गांव वासी आज भी अपनाए हुए हैं। बर्फीले दिनों की दिनचर्या प्रत्येक गांव में देखी जा सकती है। मुड़ी भूनकर खाना,गुड-तिल-भंगोलु-बीथु के लड्डू बना कर खाना और पोस्त-अखरोट  के नमकीन सीड्डु चाव के साथ खाए जाते हैं।
कुलथ की कलथीचड़ी, खट्टी बड़िओ की बरीचड़ी, उड़द की खिचड़ी बर्फीले दिनों का विशेष आहार रहता है। गिरती हुई बर्फ का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है। बर्फ की मोटी तह से ढकी धरा व छतें चांदी सी चमक उठती है। बर्फ के लोदो  से ढकी पेड़ की शाखाएं एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं। सुकेत की ऐतिहासिक नगरी पांगणा में आज दोपहर बाद जमकर बर्फबारी हुई, इसके चलते कईयों ने जहां बर्फ का आनंद उठाया, वहीं कईयों ने परेशानियां भी झेली। बात कुछ भी हो बर्फ में खेलने, फोटो खिचवाने का मजा ही कुछ और है। दिन में हुई बर्फबारी का पिछले एक दशक का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस बार की बर्फबारी ने पांगणा ही नहीं, अपितु मंडी के मस्तक के मुकुट शिकारी देवी और कमरूनाग की अद्भुत छटा बिखेरी है।
पांगणा करसोग (मण्डी) हिमाचल प्रदेश

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