सनम मेरे

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

सनम मेरे बेशक तू मुझसे बात न कर,
दिल में बसाके, दिल से यूॅं दूर न कर ।
मोहब्बत जिंदा है मेरी, मेरे अश्कों से पूछ,
पत्थर बन, पत्थर जैसे पैदा हालात न कर ।
वादे किए, करके क्यों तोड़ दिये तुमने,
हसीं सपनों के उजालों में काली रात न कर ।
एक बार तो मुड़कर देख ले मोहब्बत की खातिर,
मेरे मासूम दिल पर इतना कठोर आघात न कर ।
मैं जैसा भी हूं, हूं तो तेरा ही… मान या न  मान,
सनम मेरे यों गमों की मेरे जीवन में बरसात न कर ।
तुम भले भूल जाना मुझे, मैं न भूलूंगा,
सनम मेरे बेशक तू मुझसे बात न कर ।
ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा

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