भारत की आजादी की पहली लड़ाई 1857 में आगरा अवध संयुक्त प्रांत के अंतर्गत वाराणसी (बनारस)जिला के महान अमर सपूतों और बलिदानी महावीर शहीदों के योगदान पर गूगल मिट 7 फरवरी को

शि.वा.ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत की आजादी के बाद किस तरह से देश के साथ 1857-58 मे गद्दारी करने वालों की संतानो ने अपने पूर्वजों की आजादी की पहली लड़ाई में की गई गद्दारी को छिपाकर बनावटी औऱ फ़र्जी इतिहास लिखवा कर देश को गुमराह किया और बनावटी एक लाख सत्तर हजार से अधिक को पेंशन और मान सम्मान दिया है और जो आज भी मिल रहीं हैं, जिसकी जांच के लिए अल हिंद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ओमकार नाथ कटियार ने 18 मई 2017 प्रधान मंत्री मोदी को लिखा था। उसके बाद 24 जनवरी 2018 को तत्कालीन होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह को जांच करने का निवेदन किया, पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
अल हिंद पार्टी के प्रधान महासचिव डॉ. निर्मल पटेल ने बताया कि अल हिंद पार्टी ने कोर्ट में केस करके 1857 स्वतंत्रता सेनानी पेंशन न देने की शिकायत की तब केंद्र ने कोर्ट को सूची न होने की बात कही तब कोर्ट ने केंद्र सरकार को सूची बनाने का आदेश दिया, पर आज तक केंद्रीय सरकार सूची बनाने में असफल रही हैं। उन्होंने बताया कि अल हिंद पार्टी ने 1857 राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाने हेतु सुप्रीम कोर्ट में केस किया, जिसमें 5 मार्च 2019 के कोर्ट आदेश पर अब केंद्र की सरकार नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लैक मे बनाने की बात कर रही है, जबकि 1857-58 में हुई लड़ाइयों में हुए शहीदों के रिकार्ड सरकार ने नहीं बनाये हैं। इसके अलावा फांसी पाने वालों, गाँव के गाँव जला कर मरने वालों की सूची, बागी भारतीयों को चोर डाकू कह कर उनपर इनाम रखकर मारने वालों, जबरन मजदूरी करने विदेशों में भेजने वालों, अंकित अपराधी जनजाति ऐक्ट लगा कर बागी परिवार जंगली जानवरों की तरह शिकार हुए, जिनका भी कोई रिकार्ड आजतक नहीं बना है ।
डॉ. निर्मल पटेल ने बताया कि भारत की आजादी की पहली लड़ाई 1857 में आगरा अवध संयुक्त प्रांत के अंतर्गत वाराणसी (बनारस)जिला के महान अमर सपूतों और बलिदानी महावीर शहीदों के योगदान पर गूगल मिट 7 फरवरी को आयोजित की गयी है, जिसमें कोई भी भाग ले सकता है।

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