दिल्ली विश्वविद्यालय में जारी नामांकन प्रक्रिया में ओबीसी अभ्यर्थियों के साथ बड़े स्तर पर भेदभाव का आरोप

डॉ सुधांशु कुमार, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

दिल्ली विश्वविद्याल में जारी नामांकन प्रक्रिया में ओबीसी अभ्यर्थियों के साथ बड़े स्तर पर भेदभाव का मामला सामने आया है।आज से जारी नामांकन प्रक्रिया में उन ओबीसी छात्रों को नामांकन नहीं दिया जा रहा है जिनके पास करेंट ईयर का ओबीसी सर्टिफिकेट नहीं है।ज्ञात हो कि जब पूरा देश कोरोना महामारी  से जूझ रहा है और देशभर के सरकारी संस्थान अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे वैसी स्थिति में ओबीसी अभ्यर्थियों का केवल इसलिए  एडमिशन नहीं देना की उनके पास करेंट ईयर का सर्टिफिकेट नहीं है, विश्वविद्यालय प्रशासन की सामाजिक न्याय विरोधी मानसिकता को दरसाता है।विश्वविद्यालय प्रशासन की मानसिकता तब और स्पस्ट हो जाती है जब यही प्रशासन EWS के छात्रों मो पुराने साल के सर्टिफिकेट पर नामांकन दे रहा है और ओबीसी को मना कर रहा है जबकि इनकम का क्राइटेरिया तो वहां भी है। 
भारत सरकार की संस्था DOPT ने इस संदर्भ में स्पस्ट निर्देशित किया है कि किसी भी ओबीसी अभ्यर्थियों की जॉइनिंग या नामांकन इसलिए नहीं रोकी जा सकती कि उनके पास वैलिड सर्टिफिकेट नहीं है। DOPT तो यहां तक कहता है कि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वो अभ्यर्थियों को न केवल सर्टिफिकेट बनाने का समय दे बल्कि बनाने में मदद भी करे। विश्वविद्यालय प्रशासन पिछले सालों तक प्रोविजनल एडमिशन देकर कैंडिडेट को 15 दिन का समय ओबीसी सर्टिफिकेट बनाने का देता था पर इसबार नहीं दे रहा। आखिर क्यों? ओबीसी कमीशन ने महामारी को देखते हुए इसबार करेंट ईयर का सर्टिफिकेट न मांगने का आदेश पहले दे रखा है।

मेंबर एकेडेमिक कॉउंसिल दिल्ली विश्वविद्यालय

Related posts

Leave a Comment