कलात्मक है कोटी में कोटेश्वर महादेव का मंदिर

हिमेन्द्र बाली “हिम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

कोटश्वर महादेव कुमारसैन तहसील के अधिपति देव माने जाते हैं। एक हजार ईस्वी में गया के कीर्ति सिंह राजा को लौकिक राज्य देकर स्वय महादेव यहां की धर्म संस्कृति के सर्वोच्च सत्ताधीश हैं। कोटेश्वर महादेव को अष्ठ कोटी देव माना जाता है। मान्यता है कि महादेव पाकिस्तान में स्थित हिंगलाज होते हुए हाटकोटी पहुंचे। वहां से कुमारसैन में बटाड़ा गांव के ब्राह्मण को नाग रूप में प्राप्त हुए और कालांतर में मढोली में प्रतिष्ठित हुए। मढोली के समीप कोटी में महादेव का सतलुज शिखर शैली का भव्य मंदिर है। दो फुट ऊंचे चबूतरे पर सोलह काष्ठ स्तम्भों पर मंदिर का शिखर अवलम्बित है। स्तम्भ भीमकाय शहतीरों की आयताकार संरचना पर आधारित है।
गर्भ गृह में महादेव का प्रस्तर श्रीविग्रह स्थापित है। गर्भ गृह के ऊपर अलंकृत स्तम्भों पर शंक्वाकार पैगोडा स्थापित है। पैगोडा छत्त के ऊपर आमलक पर कलश सुसज्जित  है। इसके नीचे आयताकार छत है, जो ढलवा छत्तीय सभा मण्डप के ऊपर अवलम्बित है। सभा मण्डप का भीतरी भाग अलंकृत नहीं है। सभा मण्डप के मध्य में यज्ञ कुण्ड है। स्तम्भों पर शिव पार्वती, चतुर्भुज दुर्गा, द्वारपाल व नाग के चित्र उत्कीर्णित हैं। पगोडा छत्त के नीचे फलक पर हनुमान, मलयोद्धा, हस्तारूढ़ योद्धा, हनुमान व दशानन रावण के चित्र उत्कीर्णित हैं। मान्यता है कि जब कोटी में प्रतिष्ठित कोटेश्वर महादेव  बाह्य सराज के  कुई काण्डा नाग की बहिन का पाणिग्रहण कर सतलुज के इस ओर आए तो नाग कुई काण्डा इस सम्बंध से सहमत नहीं थे।

अत: नाग ने विशाल शिला को महादेव पर प्रक्षेपित किया। महादेव के सेवक मड़ेला ने खेखर में अपने स्थान से घास के तिनके से शिला को रोक डाला। महादेव ने रीठा के बीज को नाग पर फैका, जिससे नाग की एक आंख फट गई। आज भी चार रथी यात्रा के दौरान महादेव कोेटेश्वर शरम्बल नामक स्थान पर जाते हैं और लोग कुई काण्डा नाग की ओर प्रहसनात्मक गालियां युक्त लोक गीत गाते हैं। इस दौरान नाग कुई काण्डा की पहाड़ी पर साफ मौसम में भी दैवीय प्रभाव से धुन्ध छा जाती है। कोटी में माघ संक्राति पर  बालकों के पहले बाल काटे जाते हैं। यहां मंदिर प्रांगण में प्रस्तर आमलक पड़े हैं, जिससे यह प्रमाणित होता है कि यहां काष्ठ मंदिर से पूर्व सातवीं-आठवीं शताब्दी में शिखर शैली का प्रस्तर मंदिर था। बहरहाल कोटेश्वर महादेव कुमारसैन में यहां की धार्मिक व सांस्कृतिक व्यवस्था को चिरकालिक परम्पराओं द्वारा संचालित करते आ रहे हैं।
प्रधानाचार्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (नारकण्डा) शिमला, हिमाचल प्रदेश 

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