श्रीराम काॅलेज में महात्मा गांधी की 73वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुज़फ्फरनगर। आज श्रीराम काॅलेज के सभागार में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 73वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा महात्मा गांधी के जीवन पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें महाविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों के साथ-साथ बी0बी0ए, एम0बी0ए एवं वाणिज्य विभाग के विद्यार्थियों ने भी अपने-अपने विचार प्रस्तुत कर प्रतिभाग किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीराम ग्रुप ऑफ़ काॅलेजेज़ के सचिव ई0 संकल्प कुलश्रेष्ठ, विशिष्ट अतिथि, श्रीराम काॅलेज के निदेशक, डा0 आदित्य गौतम, डा0 प्रेरणा मित्तल, प्राचार्या, श्रीराम काॅलेज एवं डा0 विनीत शर्मा, डीन एकेडमिक्स, श्रीराम काॅलेज रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीराम काॅलेज ऑफ़ मैनेजमेंट के डीन डा0 पंकज शर्मा ने की।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ई0 संकल्प कुलश्रेष्ठ, सचिव, श्रीराम काॅलेज ने गांधी की विचारधाराओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में महात्मा गांधी की विचारधारा को गांधीवाद के नाम से जाना जाता है। महात्मा गांधी उस व्यक्ति का नाम है जो असत्य को सत्य से, हिंसा को अहिंसा से, घृणा को प्रेम से तथा अविश्वास को विश्वास से जीतने में विश्वास करते थे। भले ही आज हमारे बीच राष्ट्रपिता मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी विचारधारा, आदर्श तथा सिद्धांत अब भी हमारे दिलों में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने जनभावना को महत्व देकर और परंपरागत राष्ट्रवाद की विचारधारा में सुधार करते हुए 21वीं सदी के भारत के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया। महात्मा गांधी ने विभिन्न प्रकार के रचनात्मक कार्यो के द्वारा विभिन्न समुदायों के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य किया। गांधीवाद की विचारधारा परंपरागत राष्ट्रवाद के विचारों से ऊपर है।
कार्यक्रम में श्रीराम काॅलेज के निदेशक डा0 आदित्य गौतम ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महात्मा गांधी शख्स नहीं एक शख्सियत है। उन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए छुआछूत, असमानता जैसी बुराईयों को दूर करने का प्रयास किया। उनका मानना था कि हिंसा को अहिंसा से और घृणा को प्रेम से ही दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने आदर्शो एवं विचारों के माध्यम से जहां विश्व को शान्ति एवं अहिंसा का महत्व समझाया, वहीं जनसामान्य के कल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


इस अवसर पर श्रीराम काॅलेज की प्राचार्य डा0 प्रेरणा मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सत्य और अहिंसा का उद्घोष कर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उन्होंने स्वतंत्र भारत के पुनर्निर्माण का स्वप्न देखा था। उनका मानना था कि नैतिक और सामाजिक उत्थान ही सही मायनों में अहिंसा है। उन्होंने आगे कहा कि महात्मा गांधी की सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था करूणा, प्रेम, नैतिकता और ईश्वरीय भावना पर आधारित है। उन्होंने मानव सेवा को ही ईश्वर की सेवा मानकर दलितों एवं दरिद्रों के उद्धार को ही अपने जीवन का मूलभूत उद्देश्य बनाया। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष रवि गौतम ने कहा कि महात्मा गांधी एक शख्स नहीं, बल्कि एक संस्कृति और विरासत है। उनकी विचारधारा एवं आदर्शों से मनुष्य को सीखने के लिए बहुत कुछ मिलता है, लेकिन यह भी सत्य है कि उनकी विचारधारा को कुछ घंटों में समझना मुश्किल है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का व्यक्तित्व और कृतित्व आदर्शवादी रहा है। वर्तमान समय में गांधी की विचारधारा, आदर्शों एवं सिद्धांतों ने देश को एकसूत्र में बांधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम का संचालन स्पर्श गोयल और मौ0 काशिफ आरिफ ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर एमबीए विभाग के विभागाध्यक्ष डा0 अशफाक, बीबीए विभाग के विभागाध्यक्ष विवेक त्यागी और वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष सी0ए सौरभ मित्तल सहित अन्य प्रवक्तागण मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में पत्रकारिता एवं जनसंचार की प्रवक्ता वैशाली, शिवानी बर्मन और शिवानी गुप्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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