खुशनसीब होते है वो लोग, जो देश पर कुर्बान होते है (गणतंत्र दिवस पर कवि सम्मेलन आयोजित)

डॉ. शम्भू पंवार, नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा अंतरराष्ट्रीय वंदन एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन में देश के विभिन्न भागों के साहित्यकारों ने राष्ट्रभक्तिपूर्ण कविताएं सुनाईं। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्णिमा कौशिक की सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत भाषण संस्था के महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने दिया। पूर्णिमा कौशिक एवं डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक ने देशभक्ति पूर्ण गीतों और चित्रों की स्लाइड के माध्यम से शानदार प्रस्तुति दी। संचालन डॉ. मुक्ता कौशिक ने किया।
बतौर प्रमुख वक्ता लेखक एवं आलोचक डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय चिंतन और साहित्य में राष्ट्र और राष्ट्रभक्तों की अनेकविध छविया अंकित हुई हैं। हमारे अमर सेनानियों ने राष्ट्रीय भावना को मनुष्य की स्वाभाविक भावनाओं  से उच्च स्थान दिया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्र भक्ति को प्रभु भक्ति का स्थान मिला। आजादी मिलने भर से हमारा श्रम और साधना पूरी नहीं होगी। गणतंत्र के अर्थ को समूचे रूप में साकार करना सभी की जिम्मेदारी है। वरिष्ठ साहित्यकार हरेराम वाजपेयी इंदौर ने अपनी कविता के माध्यम से शहीदों को नमन करते कहा- शत-शत नमन सादर नमन। उन शूरवीरों को जिनकी शहादत और पराक्रम से इंडिया भारत बना। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे शिक्षाविद डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख पुणे ने कहा कि अनेक साहित्यकारों ने देशभक्ति पर कलम चलाई है। उनकी कविताएं अपार उत्साह और जोश जगाती हैं। प्रवासी कवि सुरेशचंद्र शुक्ल शरद आलोक (ओस्लो) नॉर्वे ने देशप्रेम पर गीत प्रस्तुत किया- देश का गान हो देश का मान हो, हम जहां भी रहे मेरा हिंदुस्तान हो।
साहित्यकार जीडी अग्रवाल ने कहा कि गणतंत्र की सार्थकता इस बात में है कि हमें अपने कर्तव्यों को लेकर सजग होना चाहिए। संस्था के महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने कहा कि आज हम स्वतंत्र तो हैं, किंतु मानसिक गुलामी से पूरी तरह मुक्त नहीं हुए हैं। यह तभी संभव होगा जब हम अंग्रेजियत से मुक्ति प्राप्त करेंगे। वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती सुवर्णा जाधव मुंबई ने अपनी कविता के माध्यम से आह्वान किया-भारत हमारा है महान, उसकी रखेंगे हम शान।
राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक रायपुर की कविता की पंक्तियाँ –  ख़ुश नसीब होते हैं वो लोग, जो इस देश पर कुर्बान होते हैं, जान दे के भी वो लोग अमर हो जाते हैं।
गुवाहाटी की कवयित्री दीपिका सुतोदिया की पंक्तिया- मां भारती के स्वप्न सजाते हुए चलो, हर आंख से ही अश्क मिटाते हुए चलो।
डॉ. आशीष नायक रायपुर ने कहा- मेरे सपनों का भारत सदा ऊंचा उठता रहे विश्व पटल पर। यह चांद बनकर चमकता रहे।
इनके अतिरिक्त कवि सुंदर लाल जोशी, हेमलता शर्मा, भोली बेन इंदौर, गरिमा गर्ग पंचकूला, राकेश छोकर दिल्ली, डॉ. सुनीता चौहान मुम्बई, डॉ. जय भारती चंद्राकर रायपुर, डॉ. संगीत पाल कच्छ ने भी रचनाओं की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुक्ता कौशिक रायपुर ने किया।

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