श्री राम कॉलेज में टाॅपर्स टॉक आयोजित, सीनियर्स ने जूनियर्स को दिये टिप्स


शि.वा.ब्यूरो, मुज़फ्फरनगर। श्री राम कॉलेज की बौद्धिक सम्पदा एवं उद्यमिता विकास इकाई (आईपीआर एवं इडी सेल) द्वारा ‘‘टाॅपर्स टॉक‘‘का आयोजन किया गया, जिसमे बायोसाइंस विभाग के महाविद्यालय में अव्वल रहने वाले छात्रों ने नए प्रवेशित विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभवों और स्टडी टिप्स को साझा किया एवं उनका उत्साहवर्धन किया । टॉक का मुख्य उद्देश्य छात्रों को स्टार्ट अप या लघु उद्यम प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित करना, पढ़ने की क्षमता एवं समय प्रबंधन की आदत को विकसित करना रहा।
इस अवसर पर सर्वप्रथम इकाई के समन्वयक एवं बायोसाइंस विभागाध्यक्ष डॉ सौरभ जैन ने छात्रों का उत्साहवर्द्धन करने के लिए महाविद्यालय के द्वारा स्थापित की गयी उद्यमिता विकास इकाई के बारे में छात्रों को अवगत कराया एवं विभाग में वोकल फॉर लोकल थीम के माध्यम से चल रहे शोध कार्यों जैसे खाद्य आवरण द्वारा गुड़ का मूल्य संवर्धन, जलीय पादपों एवं माइक्रोबियल फार्मूलेशन द्वारा काली नदी के पानी को शुद्ध करना और गोरक्षी (बोअबाब) की एंटी बैक्टीरियल एवं एंटी फंगल क्षमता की परख करना के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी।  तत्पश्चात इस वर्ष विश्वविद्यालय द्वारा निर्गत की गई श्रेष्ठता सूची में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली माइक्रोबायोलॉजी संकाय की महाविद्यालय टाॅपर हुमा राणा ने बुद्धिमंथन की शुरुआत करते हुए विद्यार्थियों को मनोदशा निर्धारित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा की पढाई करने के लिये पर्याप्त समय और एक सही जगह की जरुरत होती है, क्योकि आपका पढाई का समय और पढ़ने की जगह आप में बडा बदलाव ला सकती है। और जो छात्र इस नियम को नही अपनाते वे पढ़ते समय चिंतित रहते है और वह कभी जान नही पाते की उन्हें कब और कहा पढाई करनी चाहिये।

??????

महाविद्यालय के एमएससी(माइक्रोबायोलाॅजी) अंतिम वर्ष की परीक्षा में दूसरे स्थान पर रहने वाली निव्या चौधरी ने अभ्यास समूह ढूंढ़ने के लिए छात्रों को प्रेरित किया।  उन्होंने कहा की जब आप एक सही स्टडी ग्रुप ढुंढने में सफल होते हो तो आप आसानी से कठिन विषय और कोर्स मटेरियल को भी आसानी से हल कर लेते हो। एमएससी माइक्रोबायोलॉजी की प्रथम वर्ष की परीक्षा में टाॅपर रही जेहरा, फरहा एवं राशि पतलन ने भी अपने विचार रखते हुए समय प्रबंधन की उपयोगिता समझायी।  जेहरा ने कहा की किसी की सहायता लेने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिये । यदि जिनसे आपने प्रश्न पूछा उन्हें उसका उत्तर या हल नही पता हो तो आप किसी और से भी सहायता ले सकते हो, क्योकि किसी की सहायता लेने से आप अपने दिमाग की आंतरिक दुविधाओं को भी दूर कर सकते हो। फरहा ने समझाया की यदि आप प्रेरित नही हो और आपका रवैया भी काफी कमजोर है, तो आपका पढ़ने का समय ज्यादा उत्पादित नही हो सकता। क्योकि कोई भी परीक्षा पास करने का आपके पास एक ही मौका होता है। राशि ने विद्यार्थियों को स्टडी प्लान को विकसित करने का महत्व बताया और कहा की समय का सदुपयोग करने की जरुरत है तभी आप बेहतर परिणाम (रिजल्ट) पा सकते हो। बीएससी माइक्रोबायोलॉजी में महाविद्यालय में टाॅपर रही अंशिका धीमान ने क्लास डिस्कशन की महत्वता बताते हुए कहा की यदि मन में कोई प्रश्न हो तो उसे पूछना चाहिये और यदि आप क्लास डिस्कशन में हिस्सा लेते हो तो आप जो दूसरे लोग कह रहे है उन बातो पर ध्यान देते हो। द्वितीय स्थान पर रही शालू सिंह ने कहा की योजना बनाने के लिये पर्याप्त समय लेना ही छात्र में पायी जाने वाली महत्वपूर्ण योग्यताओ में से एक है। अपने सप्ताह का प्रारम्भ काफी लंबे लक्ष्य को लेकर न करे बल्कि अपने लक्ष्य को छोटे-छोटे भागो में विभाजित करे।


वहीं बीएससी बायोटेक्नोलॉजी में महाविद्यालय में टाॅपर रही वर्तिका अहलावत और जूही कत्याल ने भी विद्यार्थियों के साथ अपने विचार साझा किये। वर्तिका ने कहा की ध्यान केंद्रित करने की योग्यता का होना छात्रो में पायी जाने वाली मुख्य योग्यताओ में से एक है, क्योकि हर वक्त पढाई करते समय आपके आस-पास का वातावरण शांत नही हो सकता, इसीलिये आपको पढाई करते समय विषय पर ध्यान केंद्रित करने की जरुरत है। जूही ने कहा की अगर आपने अपनी पढाई को बोझ बना लिया है तो आप इसे आज ही छोड़ दे और कोई और रास्ता अपना ले, क्योकि बोझ के साथ पढ़ाई नहीं होती। पढाई का बोझ लेकर आप केवल किताबो के साथ रह सकते है, उनमे लिखा ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकते है। बोझ बनाकर पढने से आपके नम्बर नहीं आयेगे, बल्कि इसे हल्का बनाये और इसमें अपना इंटरेस्ट जगाने की कोशिश करे।
श्रीराम काॅलेज के निदेशक डॉ0 आदित्य गौतम ने कहा कि सफल होने के लिए असफल होना बहुत ही जरुरी है। कुछ लोग असफल होने के डर से नयी चीजे करने से कतराते है। ऐसा करने से आप कभी असफल नहीं होंगे न ही आपसे कभी कोई गलती होगी, पर ऐसा करने से आप कुछ नया नहीं सिख पाओगे। ऐसा जीवन जीना व्यर्थ है, जिसमे आपने कुछ सीखा नहीं या फिर कुछ नया किया नहीं, इसलिए अपने असफल कामो से शर्मिंदा होने से अच्छा उनपर गर्व महसूस कीजिये। उनके वजह से आप एक दिन सफल होंगे। इस अवसर पर डॉ0 आदित्य गौतम, डॅा0 प्रेरणा मित्तल प्राचार्य एवं डीन एकेडमिक्स डाॅ0 विनीत कुमार शर्मा द्वारा वक्ताओं को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डॉ0 समीक्षा जोशी, विकास कुमार, अंकित कुमार, लवी शर्मा, दर्शिका शर्मा, शैवि वर्मा , छवि गोयल, रोहिणी सैनी, सायमा सफी, रजत धारीवाल, सचिन कुमार, निकुंज, सुबोध कुमार आदि प्रवक्ता मुख्य रूप से मौजूद रहें।

Related posts

Leave a Comment