भूखे देशों में भारत का स्थान घटा या………..(शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र के वर्ष 14, अंक संख्या-19, दिसम्बर 02, 2017 में प्रकाशित लेख का पुनः प्रकाशन)

मनोज भाटिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

“Is ffo doing corruption” शब्द हाल ही में भावविव्हल जेटली जी के हैं। जेटली जी ने जिस समय ये शब्द कहे, उस समय इनमें से कुछ पत्रकार तो पत्रकारिता छोड़कर मोदी के दिवाली मिलन समारोह मे सेल्फी विद मोदी खींचने में व्यस्त थे और कुछ घास छीलने में। अब सवाल ये हैं कि ये “Is ffo doing corruption” है या “Is ffo doing business” सरकार को ये आइना दिखाने का काम कौन करेगा, क्योंकि इनके ऊपर सकारात्मक पत्रकारिता और नो निगेटिव न्यूज का भूत चढ़ा हुआ है। पराड़कर ओर गणेश शंकर विद्यार्थी वाली पत्रकारिता ये कैसे करेगें, जब इन्होने उनको पढ़ा ही नही?
यहाँ मोदी जी और मोदी जी के मंत्री रोज नया शिगूफा छोड़ देते हैं अब यह एक नया शिगूफा कि पांच साल यानी 2022 में हम 83 हजार किलोमीटर सड़क बना देंगे, इसके लिए एक और नया नाम इजाद कर लिया। भारतमाला परियोजना यह सुन कर मीडिया लहालोट हो रहा है, लेकिन कोई इनसे ये नही पूछ रहा कि भाई आप जो सागरमाला परियोजना लेकर आऐ थे उसका क्या हुआ वो किसके गले में डाल दी? आज से दो साल पहले इसी अक्टूबर में ही केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक अहम घोषणा की थी उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना सागरमाला पर 70 हजार करोड़ रु खर्च करेगी। सागरमाला का मकसद भारत के शिपिंग क्षेत्र की तस्वीर बदलना था, इसके तहत बंदरगाहों को आधुनिक बनाया जाना था और उनके इर्द-गिर्द विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित किये जाने थे, जिससे 50 लाख नौकरियों का सृजन होना था। क्या आज किसी पत्रकार ने पूछा कि वो 50 लाख नौकरियां कहां है, 70 हजार करोड़ का क्या किया, कितने बंदरगाह आपने विकसित किये, आखिर ये माला अब किसकी वरमाला बन गई? हम आज हर दिन 14 किलोमीटर सड़क बना रहे हैं और उम्मीद है मार्च तक 30 किलोमीटर सड़कें प्रतिदिन बनाने लगेंगे कहने वाले गडकरी जी, कहां बनी हैं 30 किलोमीटर सड़कें प्रतिदिन जरा बताइये? पिछले 2016-2017 नवम्बर तक 4699 किलोमीटर सड़क बनी हैं, यानी अभी भी लगभग वही रफ्तार है। ये तो कमाल ही हो गया। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार तो यूपी में 7 महिनों में ही 10 लाख मकान बनाने की बात कह गये और वो भी बिना बालू (रेत) के। यार! ये शोशेबाजी, शगुफेबाजी अब मंत्री से लेकर संत्री तक सब करेगें क्या? किसी भी सरकार के खिलाफ सही मायनों में अगर कोई स्थायी विपक्ष होता है, तो वो केवल मीडिया होता हैं, लेकिन आज वो ही चरण वन्दना में अपनी सद्गति खोज रहा हैं और सरकार कभी सागरमाला, कभी भारतमाला, कभी जयमाला करके अर्थव्यवस्था को ही चन्दन की माला पहना कर अपनी उपलब्धियां गिना रही है और मीडिया मोदी के साथ सेल्फी खीचने को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि समझ रहा है। चलो छोड़ो यार! बस ये बता दो कि भूखे देशों में भारत का स्थान घटा है या बढ़ा है..?

वरिष्ठ पत्रकार खतौली, (मुजफ्फरनगर) उत्तर प्रदेश

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