बालिकाओ का जन्म व शिक्षा का अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित


शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त कलेन्डर के अनुसार जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजीव शर्मा के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से  भागवन्ती इण्टर कालेज नई मन्डी में बालिकाओ का जन्म एवम् शिक्षा का अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने उपस्थित समस्त छात्र एवम् छात्राओं को बताया गया कि भारत को आजाद हुए 70 वर्षो से अधिक हो गये हैं, परन्तु हम वास्तविक रूप से तभी स्वतंत्र होगे जब मानसिकता परिवर्तित होगी, जबकि देश की आधी आबादी अर्थात महिलाआं कों स्वस्थ व सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने कहा कि बच्चियों के साथ घिनौने अपराध होना विभिन्न स्तरों पर उनके साथ भेद भाव किया जाना समाज व देश का मानसिक रूप से परतन्त होने का द्योतक है। इस दिशा में बहुत प्रयास किये जा चुके है तथा किये भी जा रहे है, परन्तु अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। बालिकाओं को देश का संविधान अन्य व्यक्तियों की भाॅति अधिकार प्रदान करता हैं। उन्होने कहा कि अनुच्छेद 14 में विधि के समक्ष समानता, अनुच्छेद 15 लिंग के आधार पर भेद भाव न किया जाना, अनुच्छेद 19 में बोलने का अधिकार, अनुच्छेद 23व 24 में उत्पीडन के विरूद्ध अधिकार प्राप्त है। इसके अतिरिक्त भू्रण हत्या को रोकने के लिए मैडिकल टरमिनेशन ऑफ़ प्रेगनेन्सी एक्ट 1971 प्रावधान करता है कि गर्भवती महिला की जान बचाने के अतिरिक्त अन्य किसी दशा में गर्भपात नही कराया जा सकता। उन्होने बताया कि प्री नेटल डाईगनोस्टिक टैक्नीक एक्ट में प्राविधान हैं अल्ट्रासाउन्ड तथा जाॅच करने वाले सभी क्लीनिंक पंजीकृत होगे। यदि डाक्टर द्वारा गर्भवती महिला या उसके रिश्तेदारों को शब्दों या इशारे से भ्रूण के लिंग के बारे में बताया जाता है तो तीन से पाॅच साल का कारावास तथा 50,000/- रूपये जुर्माना हो सकता है तथा लाईसेन्स भी रदद किया जा सकता है।


सलोनी रस्तोगी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में बालिकाओं को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है और यह अधिकार उन्हे गर्भ से ही प्राप्त हो जाता है। सचिव द्वारा यह भी बताया गया कि बालिकाओं को संविधान के अनुच्छेद 21-ए के तहत शिक्षा का मूल अधिकार प्राप्त है। शिक्षा हमारा सब से बडा हथियार है तथा सशक्तिकरण का सब से बडा माध्यम है।  सभी बालिकाओं को खूब महनत कर पढाई करने के लिए जागरूक किया गया। उनके द्वारा महिलाओं के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा चलायी जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया। महिलाओं को कानून  द्वारा अनेको अधिकार दिये गये है, लेकिन जागरूकता की कमी है। महिलाओं को जागरूक करने का कार्य जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है, यदि कोई महिला मुकदमें की पैरवी आर्थिक स्थिति के कारण करने में असमर्थ है तो उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन देने पर निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जायेगा। सामाजिक कार्यकर्ता बीना शर्मा द्वारा विभिन्न हैल्प लाईन नम्बरों के बारे मेें बच्चों को बताया तथा कहा कि सभी लडके लडकियों व महिलाओ के साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसा वे अपनी बहनों व घर की महिलाओं के लिए दूसरों से अपेक्षा करते है। तथा सभी छात्र व छात्राओं को कोविड -19 करोना वायरस के बारे मे जानकारी देते हुए जागरूक किया गया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य डा0 सुनीता गौड, श्रेहा अग्रवाल, रिया गर्ग, कनिका तेजस, इशिका सैनी, शशि शर्मा आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहें।

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