ग्रामीण विकास सेवा मानव सेवा संस्थान में ट्रान्सजेन्डर पर्सन केे अधिकार से सम्बन्धित

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से प्राप्त कलेन्डर के अनुसार जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजीव शर्मा केे निर्देशन में कोविड-19 के सम्बन्ध में उच्च न्यायालय व सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से ग्रामीण विकास सेवा मानव सेवा संस्थान में ट्रान्सजेन्डर पर्सन केे अधिकार से सम्बन्धित कार्यशाला आयोजित की गयी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोगी ने मध्यस्थता व लोक अदालत के महत्व को समझाते हुए बताया कि ट्रान्सजेन्डर व्यक्तियों को सदियों से परिवार व समाज में उपेक्षा का सामना करना पडा है। शिक्षा, रोजगार, घर, स्वास्थ्य आदि तथा अन्य मामलों में भेदभाव जैसी समस्याए ट्रान्सजेन्डर (किन्नरों) की मुख्य समस्याए रही है। इस भेदभाव को समाप्त करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ के मामले में यह निर्णय दिया कि ट्रान्सजेन्डर व्यक्तियों को वे सभी संवैधानिक व विधिक अधिकार प्राप्त है, जो कि अन्य व्यक्तियों को भारत मेें प्राप्त है। ट्रान्सजेन्डर व्यक्तियों को तृतीय लिंग की श्रेणी में रखा जाये।

सलोनी रस्तोगी ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 के अनुसार उन्हे भी विधि के समक्ष समानता का अधिकार प्राप्त है तथा लिंग के आधार पर उनके साथ भेदभाव नही किया जा सकता। अनुच्छेद 21 के तहत उन्हे गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा सरकार को निर्देश दिये गये कि विभिन्न दस्तावेजो जैसे पासपोर्ट, ड्राईविंग लाईसेन्स, शिक्षा, अस्पतालों के फार्मो में महिलाओ व पुरूषों के अलावा तीसरा विकल्प  ट्रान्सजेन्डर दिया जाये। उक्त निर्णय के बाद वर्ष 2019 में  द  ट्रान्सजेन्डर पर्सन (प्रोटेक्शन ऑफ़ राइटस) एक्ट संसद द्वारा पारित किया गया। उक्त अधिनियम में  ट्रान्सजेन्डर व्यक्तियों के विभिन्न अधिकारों की रक्षा हेतु सरकार द्वारा पोषित शिक्षण संस्थान  ट्रान्सजेन्डर के साथ शिक्षा प्रदान करने में किसी भी प्रकार का भेदभाव नही करेगे। सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्थाओं में रोजगार हेतु इनके साथ कोई भेदभाव नही किया जायेगा। स्वास्थ्य सुविधाओं के सम्बन्ध में सरकार कल्याणकारी योजनाए बनायेगी तथा अस्पतालो में इनके साथ भेदभाव नही किया जायेगा जैसे प्रावधान किये गये है।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने अवगत कराया कि अगस्त 2020 में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 में संशोधन कर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि भूमि में ट्रान्सजेन्डरों को भी उत्तराधिकार का अधिकार प्रदान कर दिया गया है। उन्होनी बताया कि आर्थिक रूप से अक्षम  ट्रान्सजेन्डर यदि अपने मुकदमें की पैरवी करने में असमर्थ है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निः शुल्क अधिवक्ता प्रदान किया जायेगा। सलोनी रस्तोगी ने कहा कि कानून व सरकार द्वारा ट्रान्सजेन्डर समुदाय के साथ हो रहे भेद भाव को समाप्त करने के प्रयास किये जा रहे है, परन्तु वे प्रयास तभी फलीभूत होगे, जब हम सभी मिलकर इस भेद भाव को समाप्त करने का निश्चय करें, क्योकि आखिरकार ये सभी हमारे समाज व परिवार का हिस्सा है। सामाजिक कार्यकर्ता बीना शर्मा ने कहा कि अब यह भेदभाव कम हो रहा है। ट्रान्सजेन्डर पढाई-लिखाई कर सकते है, रोजगार प्राप्त कर सकते है। इनकी हर प्रकार से मदद करने के लिए हम सभी को एक जुट होकर आगे आना चाहिए, ताकि इन्हे समाज की मुख्य धारा से जोडा जा सकें।

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