साहित्य संगम संस्थान दिल्ली का कार्यक्रम सम्पन्न

राजेश पुरोहित, भवानीमंडी। साहित्य संगम संस्थान दिल्ली का हर बार की तरह इस बार भी संस्थान ने भव्य छंदोत्सव, तेरह पुस्तकों का विमोचन, विद्या वाचस्पति मानद उपाधि, मनोनयन, सम्मान वितरण व इकाई का उद्धाटन बड़े ही धूमधाम से मनाया, जिसमें देश के विविध प्रांतों, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, हिमाचल, उड़ीसा और अन्य कई राज्यों से करीब 150 साहित्यकारों ने भाग लिया तथा राष्ट्रीय कवियों में ख्याति प्राप्त कई ऐसे जाने-माने साहित्यकारों का भी पदार्पण सच में नायाब रहा।

साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली के तत्वावधान में संस्थान की उत्तराखंड इकाई का उद्घाटन समारोह 17 जनवरी 2021 रविवार को सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक भव्य आनलाइन छंदोत्सव के रूप में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार शशि देवली उत्तराखंड द्वारा की गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. कविता भट्ट शैलपुत्री, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुनील दत्त थपलियाल, संस्थान के संस्थापक महागुरुदेव डॉ राकेश सक्सेना, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह मंत्र, सह अध्यक्ष कुमार रोहित रोज़, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित,कार्यक्रम का संचालन व संयोजन “नई उमंग समिति” के अंतर्गत रोहित कुमार रोज़, मिथलेश सिंह मिलिंद, विनोद वर्मा दुर्गेश, अर्चना पाण्डेय , वंदना नामदेव, अर्चना तिवारी, रूचिका राय, सरिता त्रिपाठी, ज्योति सिन्हा, जयश्रीकांत, सुनीता जौहरी, भारती यादव द्वारा बखूबी अंजाम दिया गया।

संस्थान की उत्तराखंड इकाई उद्घाटन समारोह व डॉ. नीलू सिंह तथा स्नेहलता द्विवेदी के विद्या वाचस्पति मानद उपाधि सम्मान समारोह में देश के विभिन्न प्रांतों से लगभग 150 जेष्ठ-श्रेष्ठ कवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने मनमोहक छंद बद्ध काव्यपाठ से समारोह को ऐतिहासिक व यादगार बना दिया और संस्थान के द्वारा हिंदी साहित्य के विकास में सहयोगी हर एक ऐतिहासिक कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए, संस्थान को ढेरों बधाइयाँ भी दी। कार्यक्रम की सफलतम समाप्ति के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह मंत्र ने कार्यक्रम में शामिल सभी कवियों को हार्दिक धन्यवाद कहते हुए, सभी शायरों-कवियों को “हिमवंत साहित्य गौरव” की उपाधि से नवाजा। इस कार्यक्रम में एक साथ संस्थान की तेरह पुस्तकों का विमोचन किया गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान है, जो अब तक की साहित्य मीडिया जगत में सबसे बड़ी व अहम उपलब्धि है। कार्यक्रम में प्रस्तुत छंद बद्ध रचनाओं को संकलित कर छंदमेध पुस्तक माला बनाने की पहल भी साहित्यिक दृष्टिकोण से कल्याणकारी व शिक्षाप्रद है। संस्थान द्वारा अब तक चार छंदमेध पुस्तक का विमोचन किया जा चुका है, जो साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक सभी दृष्टिकोण से कल्याणकारी भाव प्रेषित करने में पूर्ण सहयोगी होगा, ऐसा पूर्ण विश्वास है।

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