मनाही के बावजूद सड़कों पर दौड़ रही जाति सूचक शब्द व पदनाम लिखी गाड़ियां, कार्यवाही सिफर

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। शासनादेश से लेकर न्यायालय की गाइडलाइन के बावजूद पदनाम व जाति लिखी गाड़िया धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रही हैं। इसके बावजूद परिवहन विभाग के अधिकारियों की खुल नहीं खुल रही हैं और विभागीय अफसरों ने कार्यवाही के नाम पर अभी तक एक भी वाहन का चालान तक नहीं काटा है।
ज्ञात हो कि कुछ सरकारी अधिकारी वाहनों पर अपना पद नाम या विभाग का नाम लिखकर अपने पद का दुरूपयोग कर रहे थे। इतना ही नहीं कुछ अफसर तो अपने नीजि वाहनों पर अपने विभाग या पद नाम लिखवाकर लोगों पर अपना प्रभाव जमा रहे थे। इसकी आड़ में कुछ असामाजिक तत्व भी अपने वाहनों पर किसी प्रभावशाली विभाग या अफसर का पदनाम लिखवाकर लोगों पर अनावश्यक रौब गांठने लगे थे। इसकी आड़ में काफी लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले भी सामने आते रहे हैं। जिस पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय व शासन ने आदेश जारी करके किसी भी वाहन पर पदनाम या विभाग का नाम लिखवाने पर पाबन्दी लगा दी थी। कुछ दिन तो इस आदेश का पालन किया गया, लेकिन अब फिर से कुछ सरकारी वाहनों और प्रायः सरकारी अफसर तो अफसर विभागीय कर्मचारी अपने नीजि वाहनों पर उत्तर प्रदेश शासन या उत्तर प्रदेश सरकार लिखवाकर लोगों पर रौब पर गांठ रहे हैं, लेकिन प्रशासन सहित परिवहन विभाग इस ओर से मानों आंखे मूंदे बैठा है।


जानकारों की मानें तो अब तो हद ही हो गयी है, लोग अपने वाहनों पर जातिगत वाक्य भी लिखवाने लगे हैं, जैसे-जाट का छोरा, बिगडैल जाट, गुर्जर का टशन, यादव, ब्राह्मण, क्षत्रिय, के देखे है यारी ले बेठी, गलती मेरी पिटेगा तू, दम हो रोक लो आदि-आदि। ये दोहे न केवल निजी वाहनों, बल्कि कर्मशियल वाहनों पर प्रायः देखे जा सकते हैं। ऐसा नहीं है कि ये सब लिखायी केवल चार पहिया वाहनों तक ही सीमित हो, ऐसे दुपहिया वाहनों की भी कोई कमी नहीं है। इसके साथ कुछ ऐसे लोग जिनका किसी भी किसान संगठन से कोई लेना-देना भी नहीं है, वे अपने वाहनों पर किसान यूनियन का टैग लगाकर अक्सर टोल प्लाजा पर रौब गालिब करते अक्सर दिखायी दे जाते हैं। मजे की बात तो ये हैं कि सबको सबकुछ पता होने के बावजूद कोई भी कार्यवाही की पहल करने को तैयार नहीं हैं।

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