ट्रैक्टर ट्रॉली से डर रही सरकार: राहुल

शि.वा.ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने कमेटी की तुलना कमोड से की है, कांग्रेस नेता राहुल गांधी का कहना है कि मोदी सरकार को किसानों की मौत से शर्मिंदगी नहीं होती है। किसानों की ट्रैक्टर परेड से शर्मिंदगी होती है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने कमेटी की तुलना कमोड से की है। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी का कहना है कि मोदी सरकार को किसानों की मौत से शर्मिंदगी नहीं होती है। किसानों की ट्रैक्टर परेड से शर्मिंदगी होती है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने ट्वीट किया, ”एक समिति कमोड की तरह होती है। पहले आप उस पर बैठते हैं, फिर उसके बाद रिपोर्ट आती है, और फिर मामला निपट जाता है। हरि ओम।” वहीं, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में किसानों की ट्रैक्टर परेड के खिलाफ हलफनाम दायर किया है। इस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है।
गौरतलब है कि किसान ये ट्रैक्टर परेड गणतंत्र दिवस वाले दिन निकालने वाले हैं। मालूम हो कि हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर डेरा डाले हुए हैं। किसान केंद्र द्वारा लाए गए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। हलफनामे में केंद्र ने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड में किसी भी तरह का व्यवधान देश के लिए शर्मिंदगी की बात होगी। मालूम हो कि किसानों और केंद्र के बीच कानूनों को लेकर गतिरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कल कानूनों को लागू किए जाने पर रोक लगा दी है। किसानों ने सरकार को चेताया है कि वे गणतंत्र दिवस वाले दिन राजधानी दिल्ली में बड़ी ट्रैक्टर परेड करेंगे। इस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरेते हुए ट्वीट किया,”60 से ज्यादा किसानों की शहादत सरकार को शर्मिंदा नहीं करती है… लेकिन मोदी सरकार को ट्रैक्टर रैली से शर्मिंदगी होती है।” एक आंकड़े के मुताबिक बीते नवंबर से अब तक 60 से ऊपर किसान आंदोलन के बीच अपनी जान गंवा चुके हैं। किसान कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। ऐसे में कई किसानों की तबियत बिगड़ने से भी जान गई है। दुख की बात ये है कि कई किसानों ने इस बीच आत्महत्याएं भी की हैं।
विपक्षी नेताओं में से राहुल गांधी ने कृषि कानूनों के खिलाफ इस आंदोलन को खुला समर्थन दिया है। किसान चाहते हैं कि सरकार इस कानून को वापिस ले। लेकिन सरकार ऐसा करना नहीं चाहती है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समस्या के समाधान के लिए चार सदस्यों की समिति बना दी है। हालांकि समिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि समिति के सदस्य पहले से ही कानूनों के मुखर समर्थक रहे हैं।

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