शाला चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

बैजनाथ पथ पर बसी,कोठी है दरबार।
नौ से बारह तक लगे,बालक पढ़े हजार।।
मेरी शाला बड़ सुखदाई।
चार कुंभ से  नाता भाई।।1
नीम सागोन वन उपकारी।
जहं दरबारा कोठी भारी।।2
हाय सेकंड्री दर्जा पाई।
अब उत्कृष्ट शाला भाई।।3
सौ सालों की याद दिलाती।
हरियाली भी मनको भाती।।4
मेरी शाला सुंदर उपवन।
शारद ज्ञाना महकी मधुवन।।5
कोयल मीठे राग सुनाती ।
तोता मैना मन भरमाती।।6
सन अस्सी में जब मैं आया।
लाकर टीसी नाम लिखाया।।7
आठम कक्षा मेरिट लाया।
वजिफा तीन साल तक पाया।।8
कक्षा नवमी लगत सुहाई।
शाला सब मित्रों को भाई।।9
कुंभ कारणे तुरत परीक्षा।
सबको मेला देखन इच्छा।।10
शुक्ला जी सर पिता समाना।
प्रंसीपल थे सोलह आना।।11
जैन आरसी गणित पढ़ाते।
गुप्ता गुरु भौतिक समझाते।।12
प्रेमचंद जी हिन्दी ज्ञाता।
स्काउट की करते बाता।।13
देख रसायन रोना आता।
ऊपर जाती मैं सो जाता।।14
क्षार अम्ल भी किये प्रयोगा।
करके हाथों से भी देखा।।15
चुम्बक दोलन थर्मा मीटर।
विद्युत बल उरजा अरु हीटर।।16
देवी सर की करूं बड़ाई।
आंख बंद कर टेंस सिखाई।।17
रेस्ट पहले हम भग जाते।
कुआ बावड़ी में हम न्हाते।18
बरगद बूढ़ा दादा जैसा।
ऊपर चढ़ते खेले ऐसा।।19
गुलाम डंडा हूल गदागद।
गेंद की मार चलें फटाफट।।20
खेल क्रिकेटा समय गंवाये।
जिससे नंबर भी कम पाये।।21
एन सी सी चौहान चलाते।
डंडा देख सभी थर्राते।।22
सन बाणूं में कुंभ भराया।
मैं शिक्षक बन शाला आया।।23
नवमी दसवी खूब पढ़ाया।
श्लोक पाठ मैंने समझाया।।24
शाला मुखिया व्यास कहाते।
रोज समय पर स्कूल आते।।25
बी एड फाइल भी बनवाता।
निज सचिव बन काम कराता।26
सन दो हजार चार सुहाया।
पुरी अवंती कुंभ भराया।।27
हिन्दी हेतू मुझे बुलाया।
झिकडिया से फिर मैं आया।।28
ग्यारह बारह क्लास पढ़ाता।
समय समय चालीसा गाता।।
गीत सोरठा दोहा गाये।
सुनकर बालक सब हरषाये।।30
तेरह में पद उन्नति पाई।
संस्कृत आंग्ल दोनो आई।।31
फिर सन सोलह कुंभ भराया।
अंग्रेजी शिक्षक बन आया।।32
जब अंग्रेजी चालिसा देखा।
सबके मन में प्रश्न अनेका।।33
एक परीक्षा फिर से आई।
जिसमें मेरिट मैंने पाई।।34
हिन्दी शिक्षण पाठ पढ़ाता।
नवाचार गाकर समझाता।।35
चार कुंभ की कही कहानी।
मैने अनुभव सार बखानी।।36
सन अट्ठाइस किसने देखा।
मेरा भी है अंतिम लेखा।।37
नित उठ बैजनाथ हम जाते।
शिखर देखकर वापस आते।।38
हे प्रभु मुझको पार लगाना।
कर्तव्य मारग बोध कराना।।39
जयजयजय शाला सुखदाई।
शीश झुकाता शारद माई।।40
शाला उत्कृष्ट हो गई, आगर की है शान।
संसाधन सब सुलभ है,कहत हैं कवि मसान।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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