शक्तिभवन मे बैठे डैडी सहित कइयों गले की फांस बन सकती है UPPCL में बिलिंग कम्पनियो की जाँच

शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के लगातार घाटे से एक बात तो साफ हो गई है कि इसे बचाने में जहाँ एक ओर विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियो सहित प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एक इन्जीनियर की तरह खुद मैदान में उतरकर प्रयासरत है, वही दूसरी तरफ UPPCL प्रबन्धन मे बैठे कुछ लोग इस मुहीम को फेल में कोई कसर नहीं छोड़ते रहे है। इसका जीता-जागता उदाहरण उपभोक्ता संरक्षण और सेवा के नाम पर UPPCL में सैकड़ो ऐप, कम्प्यूटर साफ्टवेयर, सर्वे कम्पनियां, बिलिंग कम्पनियां, मंहगे दरों पर टेंडरों का होना, पावर पर्चेज में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व अपने आकाओ को खुश करने के लिए महगी बिजली खरीद, केन्द्रीय योजना मे मिले अनुदान का समय से पूरा ना होने कि वजह से अनुदान का ऋण मे बदल जाना और बेकार के सलाहकारो कि लम्बी चौडी फौज का होना है। अब बेवजह बिजली थानो के गठन आदि से यह साफ हो गया है जनता की गाढी कमाई को संगठित हो कर लूटा जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि इन दिनों प्रदेश के ऊर्जामंत्री और प्रबन्धन में बैठे सबसे बड़के बाबू में तल्खियां साफ नजर आ रही है, जिसकी बानगी लगातार समीक्षा बैठकों और वीडियो कांफ्रेंसिंग महसूस करने और देखने पर साफ़ पता चलता है। इसकी चर्चा UPPCL से जुड़े शीर्ष अधिकारियों की दबी जुबान में सुनने को भी मिल रही है। इन सबमे सबसे बड़ा नुकसान करोड़ो उपभोक्ताओं का होना तय है।
प्रदेश के ऊर्जामंत्री के बिलिंग कम्पनियो की एसटीएफ (stf) से जाँच के संबंध में प्रकाशित हुए बयान से जहा भ्रष्टाचारियो में भगदड़ मची है तो बड़केबाबू के स्टाफ ऑफिसर के रूप में ब्रोकर की भूमिका निभाने वाले डैडी के फोन की घण्टिया घनघनानी शुरू हो गयी है। सूत्र बताते हैं कि लम्बे समय से UPPCL में काम करने वाली सभी कार्यदायी बड़ी कम्पनियो को काम दिलाने और भुगतान कराने की पूरी जिम्मेदारी बड़ी चालाकी से निभाने वाले को लोग डैडी के नाम से पुकारते हैं। यह तय है कि अगर ऊर्जा मंत्री द्वारा बिलिंग कम्पनियो के अनियमितता की जांच हुई तो इस डैडी का फंसना तय है।

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