कोरोना काल में बेसिक शिक्षा के लिए बेहद कारगर रही दीक्षा

दीक्षा ऐप का दायरा पिछले कई माह में बढ़ गया है। यह मोबाइल ऐप अपनी लाचिंग के साथ ही बेसिक शिक्षा का अनिवार्य अंग बन गया था। सभी कक्षाओं की किताबों में दिए गए क्यूआर कोड के जरिए पाठ्यक्रम से सम्बन्धित आडियो व विजुअल सामग्री बच्चों को दिखाई व सुनाई जाती थी। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं। कोरोना के प्रकोप के चलते जब स्कूल बंद हो गए तो स्कूली शिक्षा महानिदेशक व अन्य उच्च अधिकारियों ने बच्चों की पढ़ाई घर पर सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की आनलाइन क्लास के अलावा दीक्षा ऐप का प्रयोग करने का फैसला किया। तय किया गया कि अभिभावकों के स्मार्टफोन पर भी इसे डाउनलोड कराया जाए जिससे बच्चों को घर बैठे सभी विषयों की पाठ्य सामग्री मिल सके।
इन दिनों विभाग बेसिक शिक्षकों की आनलाइन ट्रेनिंग दीक्षा ऐप के माध्यम से करा रहा है। बच्चों की भाषा, कैलेण्डर से गणित व उपचारात्मक शिक्षण और निष्ठा जैसे ट्रेनिंग प्रोग्राम दीक्षा ऐप के जरिए ही कराए जा रहे हैं। 20 जुलाई से शिक्षकों की ट्रेनिंग का कार्यक्रम तय किया गया था जो अब तक जारी है। इससे विभाग के साथ ही शिक्षकों को भी सहूलियत होगी व कोरोना का खतरा कम होगा। विभाग दीक्षा ऐप के डाउनलोड एवं विविंग टाइम(देखा जाने वाला समय) के आंकड़ों की लगातार समीक्षा करता है। विभाग ने प्रत्येक शिक्षक व स्मार्टफोन धारक अभिभावक के मोबाइल फोन में दीक्षा ऐप डाउनलोड सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक विषय के हर पाठ में मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर दीक्षा ऐप का लिंक खुल जाता है। वहां उस पाठ से सम्बन्धित विषय सामग्री मौजूद रहती है। पुस्तक वितरण के बाद बच्चों के लिए इस दौर में पढ़ना आसान होगा। हालांकि ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क, स्मार्टफोन की उपलब्धता जैसी व्यवहारिक समस्याएं भी हैं।

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