मुबारक

होरी लाल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मुबारक-मुबारक हो तुमको
तुम्हारी कोरमा बिरयानी
हम तो खुदा की नियामत
खाते हैं रोटियां
मुबारक-मुबारक…..
वक्ते पांच नमाज़
अता करके चैन से सो जाते हैं
आती हैं सदाऐं
मस्जिद से अजा़न की
बिस्तर से उठ जाते हैं
दौलत ईमान की कमाकर
पैगाम खुदा गाते हैं
खरचे से घटती नहीं
रोज़ बढ़ती जाती है
मुबारक हो तुमको
उल्फत के नगमें
हम तो मुहब्बत
खुदा से करते हैं
मुबारक-मुबारक हो तुमको
तुम्हारी कोरमा बिरयानी
गंगानगर साकेत मेरठ, उत्तर प्रदेश

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