झूठे के सिर पर इज्जत का ताज देखा


होरी लाल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

झूठे के सिर पर
इज्जत का ताज देखा
सच्चे को भूख से
व्याकुल देखा
सज्जन को मदिरा
पीते देखा
धर्मदास का काला
धंधा देखा
भक्तराज को
परधन से हरते देखा
सेवक स्वामी का
हन्ता देखा
काला काम चलते देखा
क्या बताऊ होरी
मैंने क्या-क्या देखा
जहां भी देखा
धर्म में अधर्म देखा
लुप्त हुआ संदेश गीता
वक्ता को गुमराह देखा
गले में मुक्तमाला
मन सबका काला देखा
कहनी-करनी पास नहीं
ऐसा उपदेशक देखा
निर्णायक को
सुरा-सुन्दरी में लिप्त देखा

गंगानगर साकेत मेरठ, उत्तर प्रदेश

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