1857 क्रांति की अमर गौरव गाथा और अमर शहीद राजा जयलालसिंह

कुंवर ऋषभ सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानी अमर शहीद राजा जयलाल सिंह और राजा बेनीमाधव सिंह को देश बड़े गर्व से याद किया जाना चाहिए, परन्तु कुछ महानायकों के महान व्यक्तियों एवं कृतित्व से हमारा समाज अधिक परिचित नहीं है, जो कि 1857 के महान क्रांतिकारी व हमारे कूर्मि समाज के महान हस्तियों मे से एक हैं। अमर शहीद राजा जयलाल सिंह का जन्म 31 मई 1803 ई० मे राजा दर्शन सिंह “गालिब जंग” के सम्पन्न कूर्मि राजकुल परिवार मे बौडरास्टेट (अतरौलिया) जिला आजमगढ़ मे हुआ था। वे अपने पिता के ज्येष्ठ पुत्र थे। इनके बारें में किसी इतिहासकार ने उल्लेख तक नहीं किया। धन्य है लेफ्टिनेंट जनरल मैकलियोड इनिस, जिन्होंने राजा जयलाल सिंह के विषय मे अपनी पुस्तक “Lucknow & Awadh in Munity -A Narrative and Study” (1895) मे लिखा है।

उत्तर प्रदेश सूचना विभाग द्वारा प्रकाशित “Freedom Struggle in Uttar Pradesh” (1958) नामग्रंथ मे राजा के क्रियाकलापों पर वृहद प्रकाश डाला गया हैं। 1857 क्रांति के सम्बंध मे जयप्रकाश वर्मा ( जेपी वर्मा, लखनऊ) द्वारा “राजा दर्शन सिंह गालिब जंग” और “राजा जयलाल सिंह नुसरत जंग” (1986) लिखी गई थी, जो कि पूर्व महानिदेशक पुलिस महेन्द्र सिंह गंगवार ने प्रकाशित कराई थी। 1857 क्रांति के संचालन मे अद्भुत कुशलता प्रदर्शित करने वाले शहीद राजा जयलाल सिंह और राजा बेनी माधव सिंह के प्रमुख कृत्य व योगदान का उल्लेख प्रसिद्ध इतिहासकार रोशनलाल पटेल (बरेली) द्वारा सन् 2001 मे प्रकाशित पुस्तक “अमर शहीद राजा जयलाल सिंह”, “राजा बेनी माधव सिंह”, “अनमोल नवरत्न भाग-1” और “अनमोल नवरत्न भाग-2” नामक पुस्तक मे राजा साहब के इतिहास के बार मे बडी़ अच्छी तरह लिखा है।


कूर्मि क्षत्रिय सभा और हमारे समाज के कुछ बौद्धिक व्यक्तियों द्वारा समय-समय पर किताबों व पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से राजा साहब के इतिहास को जन जन तक पहुंचने का प्रयत्न किया जा रहा है।  आवश्कता है कि हम भारत वीर शिरोमणि अमर शहीद राजा जयलाल सिंह और राजा बेनी माधव सिंह के इतिहास जन जन तक पहुचाये, समझे उन्हें याद करें। राजा जयलाल सिंह व राजा बेनी माधव सिंह अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है और इसे संजोए रखना हमारा पवित्र कर्त्तव्य हैं, ताकि देश भावी पीढी प्रेरणा लेकर आगे बढ सके।
शहीदों की चिंताओं पर जुडे़गे हर बरस मेले।। वतन पर मिटने वालों का यहीं बाकी निशां होगा।।

बौडरा रियासत (स्टेट) अतरौलिया आजमगढ़ उत्तर प्रदेश 

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