विडम्बना


होरी लाल होरी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

ओ बेवफा!
जब मेरी वफा याद आयेगी
मेरी अर्थी शमशान को
तू स्नानघाट को जायेगी
मांग का सिंदूर, पैर की विधिया
कर की चूडियां उतारी जायेंगी
वही सुहागिन तुमको अभागिन बनायेंगी
जब मेरी वफा याद आयेगी

सिसकियां भर कर रोयेगी तू
मेरी कही किसी किसी बात को
याद करके कहोगी
बस अब नहीं सहे जाते
सितम तकदीर के
वापस आ जाओ
या बुला लो पास मुझे
हर अधिकारों से वंचित कर
सुहागिन से अभागिन बना दी जायेगी
शेष अंतिम चिता की राख भी
तुमको नहीं दिखायी जायेगी।
जब मेरी वफा याद आयेगी
मेरठ, उत्तर प्रदेश

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