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छात्रों! भारतीय भाषाओं की वर्णमाला विज्ञान से भरी है। वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर तार्किक है और सटीक गणना के साथ क्रमिक रूप से रखा गया है। इस तरह का वैज्ञानिक दृष्टिकोण अन्य विदेशी भाषाओं की वर्णमाला में शामिल नहीं है। देखें-
क ख ग घ ड़ – पांच के इस समूह को कण्ठव्य कहा जाता है, क्योंकि इस का उच्चारण करते समय कंठ से ध्वनि निकलती है। उच्चारण का प्रयास करें।
च छ ज झ ञ – इन पाँचों को तालव्य कहा जाता है, क्योंकि इसका उच्चारण करते समय जीभ तालू महसूस करेगी। उच्चारण का प्रयास करें।
ट ठ ड ढ ण – इन पांचों को मूर्धन्य कहा जाता है, क्योंकि इसका उच्चारण करते समय जीभ मुर्धन्य (ऊपर उठी हुई) महसूस करेगी। उच्चारण का प्रयास करें।
त थ द ध न – पांच के इस समूह को दंतव्य कहा जाता है, क्योंकि यह उच्चारण करते समय जीभ दांतों को छूती है। कोशिश करें।
प फ ब भ म – पांच के इस समूह को अनुष्ठान कहा जाता है, क्योंकि दोनों होठ इस उच्चारण के लिए मिलते हैं। कोशिश करें।
य. र. ल. व. को क्रमश: तालव्य, मूर्धन्य, दांतव्य और दंतोष्ठय कहा गया है।
श. ष. स. को क्रमश: दांतव्य, तालव्य और मुर्धन्य कहा गया है।  कण्ठव्य है।
क्ष त्र ज्ञ ऑ श्री को संयुक्त अक्षर माना जाता है।

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