शहीद मंगल पांडे राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मेरठ। शहीद मंगल पांडे राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण योजना मिशन शक्ति को कार्यान्वित करने के दृष्टिगत द्विभाषीय मीडिया जर्नल कम्यूनिकेशन टुडे के संयुक्त तत्वावधान में एक ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया जिसका विषय था ‘महिलायें और समाज: एक अलग परिप्रेक्ष्य’, जिसका संभावित उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं को सशक्त सम्माननीय और सुरक्षित बनाना रहा है।

वेबीनार का उद्घाटन मां शारदे की वंदना से डॉ. उषा साहनी ने तथा अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. दिनेश चंद ने की। महाविद्यालय मिशन शक्ति समन्वयक डॉ. लता कुमार ने सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। विषय के संदर्भ में बोलते हुए सूरत में बतौर डीपीसी कार्यरत आईपीएस अफसर सरोज कुमारी ने कहा कि सरकार महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के सभी प्रयास कर रही है। महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वावलंबन से संबंधित सभी स्तरों पर शासन की विभिन्न योजनाएं संचालित है, लेकिन इतना ही काफी नहीं है, इसके लिए महिलाओं को भी जागरुक होना होगा। कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ता के तौर पर उपस्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय देवबंद की प्राचार्य प्रो. मोनिका सिंह ने कहा कि महिलायें अब अबला नहीं हैं, वे हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं। मीडिया के द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा करते हुए आईआईएमसी नई दिल्ली प्रो. गोविंद सिंह ने महिला पत्रिकाओं का उल्लेख करते हुए उनकी भूमिका की व्यापक चर्चा की और सरिता, मुक्ता एवं वनिता जैसी महिला आधारित पत्रिकाओं को महिला जागरूकता में महत्वपूर्ण बताया।

फ़ाउंडर निदेशक क्रिएटिव टीचिंग विद्या इंस्टिट्यूट मेरठ डॉ. अनिता कोटपाल ने महिलाओं की शिक्षा में आने वाली बाधाओं पर चिंता व्यक्त की और मिशन शक्ति को सफल बनाने में शिक्षा को बहुत ही महत्वपूर्ण घटक बताया। वेबिनार के संयोजक प्रो. संजीव भानावत ने अपने उद्बोधन में महिलाओं की ऐतिहासिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान और भावी सम्भावनाओं पर व्यापक चर्चा की। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. दिनेश चंद ने सभी अतिथियों और वक्ताओं का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव डा. उषा साहनी ने किया। पृथ्वी सेंगर ने तकनीकी सहायक के रूप में सहयोग किया। गूगल मीट पर आयोजित यह वेबिनार लगभग तीन घंटे तक संचालित रही, जिसमें लगभग 250 विद्वानों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने प्रतिभागिता की।

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