अपने देश की क्रोनोलॉजी

सुनील वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

चीन से एक खबर आती है कि चीन का तीसरे नंबर का अरबपति जैक मा पिछले दो महीने से लापता है। वजह बताई जा रही है कि पिछले साल अक्टूबर में जैक मा ने शी जिनपिंग की नीतियों की आलोचना की थी। पर ये चीन थोड़े है दोस्तों हमारा देश हिंदुस्तान है, जहां जिसे देखो वही सड़कों पे कूद-कूद के प्रधानमंत्री के बारे में कुछ भी बोलता है और.इकोसिस्टम द्वारा उसे सेलिब्रिटी बना दिया जाता है, जो प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सरकार की अक्ल ठिकाने लगाने की धमकी देने लगते है और कहते है कि इंडिया में डेमोक्रेसी भी और किसानी भी खत्म हो रही है। अब आप जरा अपने देश की भी “क्रोनोलॉजी” समझिए-2007 से लेकर आजतक भारतीय किसान यूनियन के नेता मांग करते आ रहे थे कि देश की सरकारों को कॉर्पोरेट द्वारा किसानों से फसलों को सीधी खरीद करने को अनुमति मिलनी चाहिए।


अब देखिए 2014 तक कांग्रेस सत्ता में रही और भारतीय किसान यूनियन यही उपरोक्त मांग मांगता रहा कि काँरपोरेट और किसानों का आपसी ताल-मेल होना चाहिए, पर कांग्रेस की सरकार के विरुद्ध कभी न तो कोई आंदोलन किया और न ही कभी दिल्ली कूच किया। न ही दिल्ली के बॉर्डर पर ड़ेरा जमाया और न ही जंतर-मंतर को बंधक बनाने का प्रयास ही किया।
और ये ही वजह थी कि भारतीय किसान यूनियन के कई करोड़ पति नेताओं को कांग्रेस ने अपने टिकट पर चुनाव भी लड़वाया। अगर मै गलत हूँ तो वीएम सिंह कौन थे, जिन्हेोने 2004 और 2009 में कांग्रेस के टिकट पर पीलीभीत से लोकसभा चुनाव लड़ा था…? राकेश टिकैत भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। भारतीय किसान यूनियन और कांग्रेस का ये रिश्ता क्या कहलाता है, ये किसान यूनियन वाले ही बताएंगें। जो आज हरियाणा बार्डर जामकर बैठे हुए किसानो को समर्थन कर रहें है, जो सबसे ज्यादा गैहूँ बोते है। न सब्जी बोते है न गन्ना और खुद अपने पश्चिम उत्तर प्रदेश के बार्डर पर शुगर मिल में गन्ने की ढुलाई कर रहें है। 2019 के लोकसभा चुनावों की तरफ थोड़ा घूमिए तो पता चलेगा कि भारतीय किसान यूनियन कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए वोट मांग रही थी और किसानों से यह कहकर कांग्रेस को वोट दिलवा रहा थी कि सत्ता में आने पर कांग्रेस एपीएमसी व आढ़तिया सिस्टम को समाप्त करेगी और कॉर्पोरेट द्वारा सीधे किसानों से खरीद करवाएगी, जिससे उन्हें फसल के दुगने से भी ज्यादा दाम मिलेगें और अब इन किसान यूनियनो का ये कहना कि बीजेपी की सरकार को पैसा कमाना है गरीब लोगों से, क्योकि इस सरकार के आका बिल गेट्स ने जो पैसा दिया था चुनाव में। अब उसके लौटाने का समय आ गया है और जिनके मन मे चोर होता है, वो मीडिया और जनता से ऐसे ही आँख बचाते है।


अब जरा ये बात भी समझ लेनी चाहिए कि नये कृषि बिल को फाईनल करने से पहले कम से कम दस बार देशभर के विभिन्न किसान संगठनों से केंद्र सरकार ने मीटिंग की थी, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी खुद शामिल थे। भारतीय किसान यूनियन भी शामिल थी। उस वक्त सभी किसान संगठनों ने नए कृषि बिल का समर्थन किया था। ये ही नही जब ये कानून बना तो इसकी एक-एक कॉपी सभी किसानो के संगठनो भिजवाई गई थी और राकेश टिकैत जी ने खुद 3 जून 2020 को कहा था कि यह कानून किसानों के हित में ही साबित होंगा।अखबार गवाह है, ढूंढ लिजिए। अब ये किसान संगंठन दुर्भाग्य से कनाड़ा और अरबपति आड़तियों से फंडिंड इस किसानी आंदोलन को दुसरे शाईन बाग आंदोलन की राह पर ले जाने की कोशिश कर रहें हैं। है ना कमाल की बात।

Related posts

Leave a Comment