मैं भी बेटी देश की

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

तेजस्वी लक्ष्मीबने,बेटी मेरी ताज।
बेटी कन्यादान का,पुण्य लीजिये आज।
 बाल विवाह मत कीजिए,नहि बेमेल कबूल।
शिक्षा पूरी दीजिये,अब कीजे मत भूल।
कन्या पूजन कीजिए,गर्भन हत्या बंद।
बेटी जागृत दीजिए,मिट जाए सब फंद।।
जो नर बेटी को पूजते,करते सदव्यवहार
वह घर स्वर्ग समान है,होवे भव के पार।।
बेटी को बेटा कहो,तभी बचेगा देश।
वे नर नरक में जाएंगे, करते बेटी भेद।
सबजग कलजुग छा रहा,बेटी बचा्व आज।
लक्ष्मी लाडली योजना,कन्या का है ताज।
बेटी नहीं अभिशाप है,बेटी है वरदान।
ऊंची शिक्षा पायके,बेटी बनी महान।।
आज हमारे देश में, बेटा बेटी समान।
बेटी पूजा हो रही,बड़ा है उसका मान।
जो ना बाला पाठयति,बैरी उनको जान।
 बेटी स्वर्ग का द्वार है ,कहि चाणक विद्वान।।
 विद्यालय मंदिर बने,स्वास्थ बने अधार।
मैं बेटी उस देश की, जहां बहे गंग धार।।
दिन में रोजा रखत हूं,रात लेउं हरि नाम।
मन मक्का दिल द्वारिका,आतम बसते राम।।
मैं भी बेटी देश की,ऋषिता मेरा नाम।
आगर नगरी बसत हूं, बैजनाथ के धाम।।
3 गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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