न्याय मूर्ति

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

कश्मीर नरेश मेघवान (80-40 ई.पू.) बहुत ही न्यायप्रिय, कर्तव्यपराण और धर्मपरायण राजा थे। न्याय ,कानून व्यवस्था और प्रेम भाईचारा बढ़ाने के लिए उन्होंने कठोर नियम कानून बनाये थे। राजा स्वयं भी  साधारणवेष में घूम घूमकर प्रजा के दुःख दर्द का पता लगाते और उनकी समस्याओं को हल करते थे। यदि कोई व्यक्ति किसी को सताता तो उसे कड़ा दण्ड देते थे। एक दिन राजा साधारण वेश में बनवासियों के क्षेत्र से गुजर रहे थे कि उनके कानों में बच्चे के रोने की बहुत मार्मिक चीखें सुनाई दीं, वह प्राण बचाने की गुहार लगा रहा था। राजा तुरन्त आवाज की दिशा में दौड़ पड़े। कुछ दूर पहुँचकर उन्होंने देखा एक क्रूर अंधविश्वासी व्यक्ति ने एक बालक को पेड़ से बाँध रखा है। वह तंत्रमंत्र का पाखण्ड करने के बाद उसकी हत्या करना चाहता था। बालक पास रखी तलवार देखकर जान बचाने की गुहार लगा रहा था। राजा मेघवान ने कड़कती आवाज में कहा-अरे पापी! छोड़ इस मासूम बच्चे को। किसी निरीह बालक के प्राण लेना घोर अधर्म है। उस व्यक्ति ने कहा कि उसका इकलौता बच्चा असाध्य रोग से पीड़ित है। किसी तांत्रिक के बताने पर ही उसके प्राण बचाने के लिए इस बालक की बलि दे रहा हूँ। यह सुन राजा ने कहा कि अगर तेरे बच्चे के प्राण बलि देने बच सकते हैं तो तू इस बच्चे को छोड़ दे और इसके बदले मेरी बलि चढ़ा दे, मैं तैयार हूँ। तभी अचानक वहाँ देवदूत नज़र आया। उसने कहा-राजन! मैं तो आपकी परीक्षा ले रहा था। आप वास्तव में दयालु और न्याय प्रिय हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ 

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