आमजन पर फिर भारी नियम-कानून, ग्रामीणों ब्लाॅक कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर


शि.वा.ब्यूरो, खतौली। देश की प्रथम पंचायत मानी जानी वाली ग्राम पंचायतों की कमान जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने पर अब सरकारी अधिकारियों के हाथों में सौंप दी गयी है, लेकिन अभी तक शासन की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनायी गयी है, जिससे ग्रामीणों के रोजमर्रा के कार्य आय-जाति, जन्म-मृत्यु, निवास प्रमाणपत्र आदि सुगमता से सम्पादित होते रहें। शासन की उदासीनता के चलते लागू हुई व्यवस्था तले ग्रामीण एक बार फिर पिसने को मजबूर हो गया। या यूं कहें कि नियम कानून ग्रामीणों का पोषण करने के स्थान पर शोषण का पर्याय बन गये हैं। इस सम्बन्ध में ग्राम प्रधान संगठन द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गये मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन में भी इस समस्या का समाधान करने की गुहार लगायी गयी है।
निकटवर्ती ग्राम टिटौडा के प्रधानपुत्र बालिस्टर मोतला की मानें तो गांवों में प्रशासक नियुक्त होने के ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामों में बाधा पहुंच रही है। ग्रामवासी अपनी समस्याओं को लेकर प्रधान के पास आ रहे हैं और प्रधान द्वारा लाख समझाने के बावजूद वे ग्राम प्रधान पर ग्रामीणों का काम जानबूझकर नहीं करने का आरोप सरेआम लगा रहे हैं। इतना ही गांव में विपक्षियों को भी अंगुली उठाने का मौका मिल गया है। उन्होंने बताया कि व्यवस्था से जुड़े लोेगों ने ग्रामीणों के विभिन्न प्रार्थना पत्रों पर संस्तुति करने को इस ताईद के कहा है कि वे अपनी संस्तुति के नीचे अपने हस्ताक्षर पूर्व प्रधान की हैसियत से ही कर सकेंगे। प्रार्थना पत्रों पर ग्राम प्रधान की मोहर इस्तेमाल का अधिकार अब उन्हें नहीं है।


उक्त के सम्बन्ध में पंचायत राज अधिकारी ने शिक्षा वाहिनी को बताया कि अभी इस सम्बन्ध में शासन से कोई गाइडलाइन प्राप्त नहीं हुई है, जैसे ही कोई गाइडलाइन प्राप्त होगी, उसे जनहित में प्रसारित कर दिया जायेगा। उन्होंने रोजमर्रा की समस्या के सम्बन्ध में बताया कि जन्म-मृत्यु के प्रमाण के सम्बन्ध में ग्राम पंचायत अधिकारी पहले से अधिकृत हैं, इसके अलावा अन्य समस्याओं के सम्बन्ध में ग्राम प्रधान या खुद पीड़ित अपने प्रार्थना पत्र ब्लाॅक पर जमा कराकर अगले दिन उसका प्रत्युत्तर प्राप्त कर सकता है।
बता दें कि इसी तरह की समस्या के समाधान के लिए ग्राम प्रधान संगठन ने मुख्य मंत्री को सम्बोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा है। उक्त ज्ञापन में कहा गया है कि निवर्तमान ग्राम प्रधान जिनका कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 को समाप्त हो गया था, जिससे गांव में स्कूलों का कायाकल्प, सामुदायिक शौचालय निर्माण, ग्राम सचिवाल्य व अन्य कार्य जिनका निर्माण वर्तमान में चल रहा था और कार्य अभी तक पूरा नही हुआ था, निमार्ण हेतु फर्मो से उधार सामान उठा लिया गया था। वित्तीय अधिकार समाप्त होने से उन फर्म का पैसा रूक गया है। ज्ञापन में मांग की गयी है कि उक्त धनराशि का भगतान अविलम्ब होना चाहिए और जो कार्य अधूरे हैं, वे जनहित मे पूरा कराया जाये। ज्ञापन में मांग की गयी है कि सभी गांवों मे मूलनिवास व जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिये गाम वासियों को खण्ड विकाश अधिकारी कार्यालय के यहां चक्कर काटने पड़ रहे है। जनहित मे निवर्तमान गाम प्रधानो को ही मूल व जाति प्रमाण पत्र प्रमाणित करने का अधिकार दिया जाये।

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