मुझे समझौता ही रहने दो

प्रीति शर्मा “असीम” शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मुझे समझौता ही रहने दो
जिंदगी में ,
बहुत बड़े -बड़े खवाब तो नही देखें।
मेरी आँखों में ,
छोटे- छोटे गूंगे ,सपने तो रहने दो।।
मुझे …….
जिंदगी से ,
मैंने सौदे तो नही कियें।
सच का सामना करने के लिए,
मुखौटे भी नही लिए।।
मेरा सच,
मेरे साथ रहने दो।
मुझे …….
जिंदगी से,प्यार  किया।
छल  तो नही किया।।
शब्दों की सलाखों को,
मेरे दिल के आर-पार ही रहने दो।
मुझे …….
शिकवे और शिकायतों पर,
अब न वक्त जाया कर।
शिकायतें सब मेरी,
मेरे साथ रहने दो।
मुझे …….
मैं किसी का ,
अपना कहाँ हो पाया।
पराया था,
पराया ही रह गया।
मुझे अपना तो रहने दो।
मुझे …….
देख लिया चेहरा दुनिया का,
मकसदों और सियासतों का है।
मेरा चेहरा,
बस मेरा ही रहने दो।
मुझे समझौता ही रहने दो।
मुझे …….
नालागढ़, हिमाचल- पंजाब

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