नेकदिली, संवेदनशीलता व कर्मठता के लिए पहचाने जाते हैं आईपीएस अफसर आदित्य प्रकाश वर्मा


हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

पीपीएस से आईपीएस बने आदित्य प्रकाश वर्मा अपनी नेकदिली और संवेदनशीलता के लिए पहचाने जाते हैं। वे अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए चिलचिलाती धूप या झमाझम बरसते पानी की परवाह नहीं करते हुए खुद सड़क पर उतर कर मोर्चा संभाल लेते हैं। उन्होंने कई बार बरसती बरसात व तपती धूप में ड्यूटी कर रहे यातायात कर्मियों को छाता उपलब्ध कराया है। बात अपने पदेन दायित्वों की हो या मानवता के नाते किसी के दर्द में शरीक होने की हो। आदित्य प्रकाश वर्मा हर मोर्चे पर खरे उतरे हैं। शायद उनके व्यक्तित्व का यही सबल पक्ष है, जो हर किसी को बरबस अपनी ओर आकृर्षित कर लेता है।


ताजा मामले की बात करें तो कासगंज में तैनात आईपीएस अफसर आदित्य प्रकाश वर्मा अपनी गाड़ी से किसी जरूरी काम से जा रहे थे तो उन्होंने देखा कि एक वृद्ध सड़क पार करने की कोशिश कर रहा है, उन्होंने तुरन्त गाड़ी रूकवायी और खुद वृद्ध का हाथ पकड़कर सड़क पार करायी। उनका कहना है कि असहाय की सहायता प्रसन्नता प्राप्ति का प्रमुख मार्ग है। इससे पूर्व उन्होंने मानवता का परिचय देते हुए ठंड से ठिठुर रहे थाना सुन्नगढ़ी क्षेत्रान्तर्गत ग्राम गढ़ी रामपुर में 150 बच्चों को कैप और लोवर वितरित किये थे। इसके साथ ही उन्होंने बिस्किट और चाॅकलेट भी बच्चों को बांटी थी, जिससे बच्चों के चेहर खिल उठे थे। श्री वर्मा का कहना था कि बच्चों के चेहरे पर आयी खुशी के भाव देखकर उन्हें जो खुशी मिली थी, वह लाखों रूपये या कोई पदक प्राप्त होने पर भी नहीं मिल सकती। इससे पूर्व भी उन्होंने जहांगीरपुर के प्राथमिक विद्यालय पहुंचकर सरकारी स्कूल के बच्चों से पहाड़ा सुना और उन्हें चाॅकलेट भी बांटी थी।


उनका मानना है कि काम करने के लिए एयरकंडीशन दफ्तर जरूरी नहीं है, काम तो कहीं भी किया जा सकता है। ये बात उनके लिए केवल जुबानी जमाखर्ची नहीं है, बल्कि वे उस पर अमल भी करते हैं। हुआ यूं कि वे क्षेत्र में कानून व्यवस्था का जायजा ले रहा थे, तभी उनका एक अधिनस्थ कुछ कागज लेकर उनके पास पहुंचा और उन पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया, बस फिर क्या था। आदित्य प्रकाश वर्मा ने कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मेज-कुर्सी के होने या नहीं होने की परवाह नहीं की और सड़क पर खड़े-खड़े ही काम को निपटा दिया।
आदित्य प्रकाश वर्मा की नेकदिली की बात करें तो गोरखपुर में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने एक बार सुबह अपने सरकारी आवास में किसी कारण से घायल हुई चिड़िया को देखकर परेशान हो गये और तुरन्त ही चिकित्सकों को बुलाकर उसका उपचार कराया। उपचार के बाद चिरैया जब स्वस्थ हो गयी, तब इन्होंने चैन की सांस ली थी। ऐसा ही एक मामला लाॅकडाउन के दौरान गाजियाबाद में फंसे गोरखपुरवासी युवक को जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो उसने सीधा अपने जनपद के मददगार एसपी ट्रैफिक को फोन लगाया और सारे वाकिये की जानकारी दी। आदित्य प्रकाश वर्मा ने भी सच्चे और अच्छे मददगार की तरह अपने परिचितों के माध्यम से उन्हें वहीं बैठे-बैठे मदद उपलब्ध करा दी। ऐसे हैं वर्तमान में कासगंज में तैनात आईपीएस आदित्य प्रकाश वर्मा।


आदित्य प्रकाश वर्मा हमेशा कुछ ने कुछ नया करने के लिए जाने जाते रहे हैं। गोरखपुर में पुलिस अधीक्षक यातायात के पद पर अपनी तैनाती के दौरान आदित्य प्रकाश वर्मा ने एक अनुपम पहल की थी कि हेलमेट पहन कर दो पहिया वाहन चला रहे वाहन चालकों की पत्नियों को श्रेष्ठ पत्नी सम्मान से किया सम्मानित था। सम्मानित हुई महिलाओं ने कहा था कि सम्मान मिलने से हमें खुशी की अनुभूति हो रही है। उन्होंने संकल्प लिया था कि हम हमेशा अपने पतियों को हेलमेट पहनकर ही वाहन चलाने की इजाजत देंगे। उन्होंने गोरखपुर में ही कोविड़ 19 के दौरान कई बार यातायात पुलिस के जवानों सहित यातायात सम्भालने में सहायक होमगार्ड के जवानों को मास्क और सेनेटाईजर उपलब्ध कराये थे। इसके साथ ही लोगों को यातायात का पालन करने के चलाये गये जागरूकता अभियान के तहत उन्होंने खुद स्कूल-कालेजों सेमिनार आयोजित करायी और स्कूली बच्चों को यातायात नियमों का पालन करने के फायदे व पालन नहीं करने के नुकसान से अवगत कराते हुए खुद और अपने परिजनों को यातायात नियमों का पालन कराने के लिए प्रेरित किया था। इसके साथ उन्होंने दुपहिया वाहन चालकों को हैलमेट की अनिवार्यता से अवगत कराने के लिए कभी खुद ही हैलमेट उपलब्ध कराया तो कभी सख्ती से पेश आकर उनका चालान काटकर दण्ड़ित भी किया है। वे नियमों की आड़ में आमजन को दण्ड़ित करने के स्थान पर नियमों के प्रति जागरूकता अभियान के पक्षधर हैं। उन्होंने अपनी ड्यूटी को बेहतर से बेहतर ढ़ंग से अंजाम देने के लिए नये-नये प्रयोग करने के लिए जाने जाने वाले आईपीएस अफसर आदित्य प्रकाश वर्मा ने पूर्व छात्रों व समाजसेवी लोगों के सौजन्य से होमगार्ड एवं पीआरडी के जवानों को हैण्ड ग्लब्ज व सैनिटाइजर का वितरण कराया था उनका मानना है कि इससे लोगों में जागरूकता आती है।

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