बाबा रामसिंह की आत्महत्या थ्यौरी में अजब तमाशा, सुसाईट नोट तो मिला, सुसाईट वैपन नहीं


शि.वा.ब्यूरो, सोनीपत। किसान आंदोलन के दौरान तीन बार अपनी सेवा दे चुके सिख संत बाबा रामसिंह की मौत से उनके समर्थक स्तब्ध हैं। उनके द्वारा आत्महत्या कर लिये जाने की थ्यौरी किसी के गले नहीं उतर रही है। जिस गाड़ी में उनके द्वारा खुद को गोली मार करकर खत्म कर लिये जाने की बात कही जा रही है, उसमें खून का कोई निशान नहीं मिला है और सबसे बड़ी बात ये है कि गाड़ी से आत्महत्या किये जाने से पूर्व कथित रूप से उनके द्वारा लिखा गया सुसाइट नोट मिला है, लेकिन जिस रिवाल्वर से उनके द्वारा आत्महत्या किये जाने की बात कही जा रही है, उसका कहीं अता-पता नहीं है।
बाबा रामसिंह से जुड़े लोगों का कहना है कि बाबा रिवाल्वर तो दूर अपने पास साधारण सा चाकू भी नहीं रखते थे। बाबा रामसिंह हालांकि किसान आंदोलन के दौरान दो-तीन बार सेवा करने के लिए किसानों के बीच गये थे, लेकिन उनके जानकार बताते हैं बाबा राजनीति से हमेशा अपने को दूर रखते थे। ग्राम पंचायत के चुनाव हों या कुछ और, बाबा ने हमेशा अपने आपको उनसे दूर ही रखा है। किसान आंदोलन के दौरान बाबा सेवा वास्ते किसानों के बीच दो-तीन बार गये थे और सेवा भी की थी। अब भी वे सेवा के लिए किसानों के बीच पहुंचे थे, ऐसे में वे कोई हथियार लेकर क्यों जायेंगे, ये बात समझ से बाहर है। इस मामले में पुलिस के हाथ भी कुछ नहीं लगा है। पुलिस अभी तक भी जांच की खानापूर्ति में जुटी हुई है। अब देखना है कि पुलिस की थ्यौरी इस मामले में क्या रंग भरती है और किसानों की आड़ में बाबा रामसिंह की मौत पर अपनी राजनीति की रोटियां सेकने वाले लोग इसे क्या रंग देते हैं। वे बाबा रामसिंह के आत्मबलिदान की थ्यौरी के बहाने सरकार पर कितना और कैसा दबाव बना पायेंगे और भाजपा इसे किस तरह हैंडल करेगी, अभी ये सब वक्त के गर्भ में छुपा है, जो बहुत जल्द सबके सामने उजागर होगा।
ज्ञात हो कि किसान आंदोलन के समर्थन में करनाल के सिंगड़ा गुरुद्वारा के संत राम सिंह ने 16 दिसंबर को सिंघु बॉर्डर के नजदीक कुंडली के पास अपने आप को गोली मार ली थी।. मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि किसानों के समर्थन में संत राम सिंह ने खुदकुशी की है। उन्होंने अपनी गाड़ी में बैठकर पिस्टल से खुद को गोली मार ली। खुद को गोली मारने से पहले संत राम सिंह ने सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें उन्होंने लिखा कि किसानों का दर्द नहीं देखा जा रहा है। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा कि जुल्म सहना भी पाप है, देखना भी पाप है और उसे बर्दाश्त करना भी पाप है, मैं किसान भाइयों से कहना चाहता हूं कि मैं इस स्थिति को देख नहीं पा रहा हूं। बिना पुलिस को सूचित किये ही संत रामसिंह को पानीपत के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डाॅक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस पूरे मामले में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह लीपा-पोती करता नजर आया।
बता दें कि संत बाबा राम सिंह का डेरा करनाल जिले में निसंग के पास सिंगड़ा गांव में है। वह सिंगड़ा वाले बाबा जी के नाम से दुनियाभर में विख्यात थे। हरियाणा पंजाब और दुनिया भर में संत बाबा राम सिंह को सिंगड़ा वाले संत के नाम से ही जाना जाता थ। वे विश्वभर प्रवचन करने के लिए जाते थे। संत बाबा राम सिंह सिखों की नानकसर संप्रदाय से जुड़े थे।

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