जिंदगी और महामारी

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

जिंदगी और महामारी में,
एक जंग देखता हूं।

एक आस पर ,
पल-पल मरती,
फिर से पहले ,
जैसी होगी ,
जिंदगी सोचता हूँ |

दो रोटी को तरसती,
लेकिन जिंदगी को,
कैस-कैसे जीती ,
जिंदगी देखता हूँ |

पूछ लो किसी से भी,
कौन..?
मरना चाहता है |

जिंदगी में कुछ भी नहीं ,
फिर भी जीना चाहता है |

कोई एक कारण हो ,
जीने का तो बताऊं ।

तेरी दुनिया में ,
हर नये कारण से ,
रोज जीना चाहता है|

नालागढ़ हिमाचल प्रदेश

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